Hoffnung für Alle

1. Johannes 1:1-10

Leben in Gemeinschaft mit dem Vater und dem Sohn

(Kapitel 1–3)

Das Wort, das zum Leben führt

1Das Wort, das zum Leben führt, war von Anfang an da. Wir haben es selbst gehört und mit eigenen Augen gesehen, ja, wir haben es angeschaut und sogar mit unseren Händen berührt. 2Dieses Leben ist offenbar geworden. Wir haben es gesehen und können es bezeugen. Deshalb verkünden wir die Botschaft vom ewigen Leben. Es war bei Gott, dem Vater, und hat sich uns gezeigt.

3Was wir nun selbst gesehen und gehört haben, das geben wir euch weiter, damit auch ihr mit uns im Glauben verbunden seid. So haben wir Gemeinschaft miteinander und zugleich mit Gott, dem Vater, und mit seinem Sohn Jesus Christus. 4Wir schreiben euch das, damit wir uns von ganzem Herzen freuen können1,4 Oder nach anderen Handschriften: damit ihr euch von ganzem Herzen freuen könnt..

Leben im Licht Gottes

5Das ist die Botschaft, die wir von Christus gehört haben und die wir euch weitersagen: Gott ist Licht. In ihm gibt es keine Finsternis. 6Wenn wir also behaupten, dass wir zu Gott gehören, und dennoch in der Finsternis leben, dann lügen wir und widersprechen mit unserem Leben der Wahrheit. 7Leben wir aber im Licht, so wie Gott im Licht ist, dann haben wir Gemeinschaft miteinander. Und das Blut, das sein Sohn Jesus Christus für uns vergossen hat, befreit uns von aller Schuld.

8Wenn wir behaupten, sündlos zu sein, betrügen wir uns selbst. Dann lebt die Wahrheit nicht in uns. 9Wenn wir aber unsere Sünden bekennen, dann erweist sich Gott als treu und gerecht: Er wird unsere Sünden vergeben und uns von allem Bösen reinigen. 10Doch wenn wir behaupten, wir hätten gar nicht gesündigt, dann machen wir Gott zum Lügner und zeigen damit nur, dass seine Botschaft in uns keinen Raum hat.

New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

1 यूहन्ना 1:1-10

जिनगी देवइया बचन

1जिनगी के ओ बचन, जऊन ह संसार के रचे के पहिली ले रिहिस; ओला हमन सुने हवन; ओला हमन अपन आंखी ले देखे हवन, ओला धियान लगाके देखे हवन अऊ हमर हांथ ले छुए हवन – ओहीच जिनगी के बचन के बारे म, हमन तुमन ला बतावत हन। 2ए जिनगी ह परगट होईस, अऊ हमन ओला देखे हवन अऊ ओकर गवाही देथन, अऊ हमन तुमन ला, ओ सदाकाल के जिनगी के बारे म बतावत हन, जऊन ह ददा के संग रिहिस अऊ हमर करा परगट होईस। 3जऊन ला हमन देखे हवन अऊ सुने हवन, ओकरे बारे म हमन तुमन ला बतावत हन, ताकि तुमन ला घलो हमर संग संगति मिलय। अऊ हमर संगति ह ददा के संग अऊ ओकर बेटा यीसू मसीह के संग हवय। 4ए बातमन ला हमन एकरसेति लिखत हवन, ताकि हमर आनंद ह पूरा हो जावय।

अंजोर म रेंगई

5ओ संदेस जऊन ला हमन ओकर बेटा यीसू ले सुने हवन अऊ तुमन ला सुनावत हवन; ओह ए अय – परमेसर ह अंजोर अय; अऊ ओम कुछू घलो अंधियार नइं ए। 6कहूं हमन ए कहन कि हमर संगति ओकर संग हवय अऊ हमन अंधियार म चलथन, तब हमन लबारी मारथन, अऊ सच के मुताबिक नइं चलन। 7पर कहूं हमन अंजोर म चलथन, जइसने परमेसर ह अंजोर म हवय, त हमर संगति एक-दूसर के संग हवय, अऊ ओकर बेटा यीसू के लहू ह हमन ला जम्मो पाप ले सुध करथे।

8कहूं हमन कहिथन कि हमन म कुछू पाप नइं ए, त हमन अपन-आप ला धोखा देथन अऊ हमन म सत नइं ए। 9कहूं हमन अपन पापमन ला मान लेथन, त परमेसर ह हमर पाप ला छेमा करही अऊ हमन ला जम्मो अधरम ले सुध करही, काबरकि ओह बिसवास लइक अऊ धरमी अय। 10कहूं हमन ए कहिथन कि हमन पाप नइं करे हवन, त हमन ओला लबरा ठहिराथन, अऊ ओकर बचन ह हमन म नइं ए।