Habrit Hakhadasha/Haderekh

מעשי השליחים 1:1‏-26

1‏-2תאופילוס היקר,

במכתבי הראשון1‏.1‏-2 א 1‏-2 ראה הבשורה על פי לוקס א 1 סיפרתי לך על חייו, מעשיו ותורתו של ישוע המשיח, וכיצד עלה לשמים, לאחר שנתן לשליחיו הנבחרים הוראות נוספות בגבורת רוח הקודש. 3במשך ארבעים יום לאחר צליבתו נגלה ישוע אל השליחים פעמים אחדות, והוכיח להם בדרכים שונות שהוא אכן חי. בהזדמנויות אלה הוא גם שוחח איתם על מלכות האלוהים.

4באחת הפגישות האלה הורה ישוע לתלמידיו שלא יעזבו את ירושלים עד שיבוא עליהם רוח הקודש, כפי שהבטיח להם האב. ישוע שוחח איתם על כך פעמים רבות בעבר.

5”יוחנן הטביל אתכם במים,“ הזכיר להם ישוע, ”אולם בעוד ימים אחדים תיטבלו ברוח הקודש!“

6כשנגלה אליהם ישוע בפעם אחרת, שאלו אותו: ”אדון, האם אתה עומד להשיב את המלכות לישראל?“

7”האב הוא הקובע תאריכים אלה,“ ענה ישוע, ”ואינכם צריכים לדעת אותם. 8אולם כשרוח הקודש יצלח עליכם, תקבלו כוח וסמכות להיות עדים לי בירושלים, ביהודה ושומרון ועד קצה העולם.“

9זמן קצר לאחר מכן עלה ישוע לשמים לעיני תלמידיו, ונעלם בתוך ענן. 10בעוד התלמידים מאמצים את עיניהם כדי לזכות במבט נוסף, עמדו ביניהם לפתע שני אנשים לבושים גלימות לבנות, 11ואמרו: ”אנשי הגליל, מדוע אתם עומדים ומביטים לשמים? ישוע אמנם עלה לשמים, אך יום אחד הוא יחזור בדיוק כפי שהלך מכם!“

12כשקרה הדבר הזה הם היו בהר־הזיתים, ועתה חזרו ברגל לירושלים (מרחק של פחות מקילומטר).

13‏-14כשהגיעו העירה, הם התאספו לתפילה בחדר העלייה שבו גרו. באסיפה זאת נכחו האנשים הבאים:

פטרוס,

יוחנן ויעקב,

‎אַנְדְּרֵי,

פיליפוס,

תומא,

בר־תלמי,

מתתיהו,

יעקב בן־חלפי,

שמעון מהקנאים,

יהודה בן־יעקב

ואחיו של ישוע.

היו שם גם נשים אחדות, וביניהן אמו של ישוע.

15אסיפת התפילה נמשכה ימים אחדים, ויום אחד, כשנכחו שם מאה ועשרים איש, קם שמעון פטרוס ואמר:

16”אחים, נבואות התנ״ך צריכות היו להתקיים בנוגע ליהודה, אשר בגד בישוע והוביל אליו את ההמון, שהרי רוח הקודש דיבר על כך לפני זמן רב בפי דוד המלך. 17יהודה היה אחד מאיתנו; הוא נבחר בדיוק כמונו להיות שליח. 18בכסף שקיבל תמורת הבגידה הוא קנה לעצמו שדה, ושם מצא את מותו – הוא נפל ארצה על פניו, בטנו נבקעה ומעיו נשפכו החוצה. 19הידיעה על מותו התפשטה במהירות בין כל תושבי ירושלים, והם מכנים את המקום ההוא בשפתם1‏.19 א 19 בארמית. ’חקל דמא‘, שפירושו ’שדה־הדם‘. 20דוד המלך ניבא על כך בתהלים, ואמר שביתו יהיה שומם ושאיש לא יישב בו. ובמקום אחר אמר דוד שתפקידו (של יהודה) יינתן למישהו אחר.1‏.20 א 20 תהלים סט 26; קט 8

21‏-22”משום כך עלינו לבחור במישהו אחר, אשר ימלא את מקומו של יהודה, ויצטרף אלינו בעדותנו על תחייתו של ישוע אדוננו. הבה נבחר באדם שהיה איתנו מאז הימים הראשונים – מאז שישוע נטבל על־ידי יוחנן ועד שנלקח מאיתנו לשמים.“

23הנאספים נקבו בשני שמות: יוסף יוסטוס (שנקרא גם ”בר־שבא“) ומתתיהו. 24‏-25לאחר מכן התפללו כולם וביקשו שייבחר האדם הנכון. ”אלוהים,“ התפללו, ”אתה המכיר כל לב, הראה נא לנו במי מהשניים בחרת למלא את מקומו של יהודה הבוגד, שהלך למקום הראוי לו!“

26הם הפילו גורל כדי לבחור בין שני המועמדים, ושמו של מתתיהו עלה בגורל. באותו יום הצטרף מתתיהו אל אחד־עשר השליחים.

New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

प्रेरितमन के काम 1:1-26

यीसू के स्वरगारोहन

1हे थियुफिलुस, मेंह अपन पहिली किताब म ओ जम्मो गोठ के बारे म लिखे हवंव, जऊन ला यीसू ह अपन सेवा के सुरूआत ले करे अऊ सिखोय रिहिस, 2जब तक कि ओह पबितर आतमा के सामरथ ले प्रेरितमन ला, जऊन ला ओह चुने रिहिस, हुकूम नइं दे लीस अऊ परमेसर के दुवारा स्‍वरग म नइं उठाय गीस। 3यीसू ह दुःख सहे के बाद, ए मनखेमन ला दिखिस अऊ बहुंत अकन पक्‍का सबूत दीस कि ओह जीयत हवय। ओह चालीस दिन तक ओमन ला दिखाई देते रिहिस अऊ परमेसर के राज के बारे म बताते रिहिस। 4एक बार, जब ओह ओमन के संग खाना खावत रिहिस, त ओह ओमन ला ए हुकूम दीस, “यरूसलेम सहर ला झन छोड़व, पर ओ बरदान के बाट जोहव, जेकर वायदा मोर ददा ह करे हवय अऊ जेकर बारे म तुमन मोर ले सुने हवव। 5यूहन्ना तो पानी ले बतिसमा दीस, पर थोरकन दिन के बाद, तुमन पबितर आतमा ले बतिसमा पाहू।”

6जब ओमन जुरिन त यीसू ले पुछिन, “हे परभू, का तेंह इही घड़ी इसरायलीमन ला राज ला लहुंटा देबे?”

7यीसू ह ओमन ला कहिस, “ओ बेरा या तारिख ला, जऊन ला ददा ह अपनेच अधिकार म रखे हवय, तुमन के जाने के काम नो हय। 8पर जब पबितर आतमा तुम्‍हर ऊपर आही, त तुमन सक्ति पाहू; अऊ यरूसलेम म, अऊ जम्मो यहूदा अऊ सामरिया म, अऊ धरती के छोर तक तुमन मोर गवाह होहू।”

9ए जम्मो बात कहे के बाद, यीसू ह ओमन के देखते-देखत परमेसर के दुवारा स्‍वरग म उठा लिये गीस, अऊ एक बादर ह ओला ओमन के आंखी ले छिपा लीस।

10जब ओमन यीसू के जावत बेरा ऊपर अकास कोति देखत रिहिन, त अचानक दू झन मनखे सफेद कपड़ा पहिरे ओमन के बाजू म ठाढ़ हो गीन, 11अऊ ओमन कहिन, “हे गलील के मनखेमन, तुमन काबर अकास कोति देखत इहां ठाढ़े हवव? एही यीसू, जऊन ह तुमन करा ले स्‍वरग म उठा लिये गीस, ओहीच ढंग ले ओह फेर आही, जऊन ढंग ले ओला तुमन स्‍वरग कोति जावत देखे हवव।”

यहूदा इस्करियोती के बदले म नवां प्रेरित मत्तियाह

12तब चेलामन जैतून पहाड़ ले यरूसलेम सहर लहुंट गीन। ए पहाड़ ह यरूसलेम ले एक बिसराम दिन के चलई के दूरिहा म हवय1:12 यहूदी कानून के मुताबिक एक मनखे ला बिसराम के दिन म करीब एक किलोमीटर चले के अनुमती रिहिस।13जब ओमन यरूसलेम हबरिन, त ओमन ऊपर के कमरा म गीन जिहां ओमन ठहरे रिहिन। उहां ए चेलामन रिहिन – पतरस, यूहन्ना, याकूब, अन्द्रियास, फिलिप्पुस, थोमा, बरतुलमै, मत्ती, हलफई के बेटा याकूब, सिमोन जेलोतेस अऊ याकूब के बेटा यहूदा। 14ए जम्मो झन, अऊ माईलोगन अऊ यीसू के दाई मरियम अऊ ओकर भाईमन के संग एक चित होके पराथना करे म लगे रहंय।

15तब कुछू दिन के बाद, पतरस ह बिसवासीमन के बीच म (ओमन करीब एक सौ बीस झन रिहिन) ठाढ़ होके कहिस, 16“हे भाईमन हो, ए जरूरी रिहिस कि परमेसर के बचन ह पूरा होवय, जऊन ला पबितर आतमा ह दाऊद के मुहूं ले बहुंत पहिली यहूदा के बारे म कहे रिहिस, जऊन ह यीसू के पकड़वइयामन के अगुवा रिहिस। 17ओह हमन के संग गने गीस अऊ ए सेवा के काम म भागीदार होईस।” 18(ओह पाप के कमई ले एक ठन खेत बिसोईस; उहां ओह मुड़ी के भार गिरिस; ओकर देहें ह फाट के खुल गे अऊ ओकर जम्मो पोटा ह बाहिर निकर गीस1:18 मत्ती 27:5 कहिथे कि यहूदा ह अपन-आप ला फांसी चघा लीस। अइसने हो सकथे कि ओह बहुंत ऊपर ले कूदिस अऊ जऊन रस्सी के उपयोग ओह करत रिहिस, ओह टूट गीस अऊ भुइयां म टकराईस, जेकर कारन ओकर देहें ह फाट गे अऊ ओकर पोटा ह बाहिर निकर गीस।19यरूसलेम म जम्मो झन एकर बारे म सुनिन, एकरसेति ओमन ओ खेत के नांव अपन भासा म “हकलदमा” रखिन, जेकर मतलब होथे – “लहू के खेत”)।

20पतरस ह आगे कहिस, “काबरकि भजन-संहिता म ए लिखे हवय,

‘ओकर घर ह खाली हो जावय;

ओम कोनो झन रहय, अऊ ओकर सेवा के पद ला कोनो आने ह ले लेवय।’1:20 भजन-संहिता 69:25; भजन-संहिता 109:8

21एकरसेति जतेक दिन तक परभू यीसू ह हमर संग आवत जावत रिहिस, याने कि यूहन्ना के बतिसमा ले लेके यीसू के हमर करा ले ऊपर उठाय जावत तक – जऊन मनखेमन बरोबर हमर संग रिहिन; 22बने होतिस कि ओ मनखेमन ले एक झन ह हमर संग, यीसू के जी उठे के गवाह बन जातिस।”

23एकरसेति ओमन दू झन के नांव लीन, यूसुफ जऊन ला बरसबा कहे जाथे (ओला युसतुस घलो कहे जावय) अऊ दूसर झन मत्तियाह। 24तब ओमन ए पराथना करिन, “हे परभू, तेंह हर एक झन के मन ला जानथस। हमन ला देखा कि ए दूनों म ले कोन ला तेंह चुने हवस 25कि ओह ए प्रेरितई सेवा के पद ला लेवय, जऊन ला यहूदा ह छोंड़के ओ जगह म चले गीस जिहां ओला जाना चाही।” 26तब ओमन दूनों झन के नांव म चिट्ठी डारिन, अऊ चिट्ठी ह मत्तियाह के नांव म निकरिस अऊ ओह गियारह प्रेरितमन के संग म गने गीस।