Habrit Hakhadasha/Haderekh

האיגרת אל-העברים 8:1-13

1לסיכום דברינו: יש לנו כהן גדול אידיאלי שיושב עתה לימין האלוהים בשמים, 2ומשרת במקדש האמיתי שהוקם על־ידי אלוהים ולא על־ידי אדם.

3מכיוון שכל כהן צריך להקריב מנחות וזבחים, גם המשיח צריך להקריב קורבן כלשהו.

4אילו המשיח היה חי עדיין עלי־אדמות, לא היו מתירים לו לשרת ככהן, משום שהכוהנים כאן עלי־אדמות מקריבים את הקורבנות על־פי חוקי התורה. 5כוהנים אלה משרתים רק את הדגם וההעתק של מה שקיים בשמים, כי לפני שהחל משה לבנות את משכן אלוהים על־פני האדמה, ציווה עליו אלוהים לבנות את המשכן בדיוק לפי הדגם וההעתק שהראה לו על הר סיני. 6אך לכהן הגדול שלנו יש כהונה חשובה הרבה יותר מזו של כוהני הברית־הישנה, שכן הוא מתווך בברית נעלה יותר שמבוססת על הבטחות נפלאות יותר.

7אילו הייתה הברית הראשונה מושלמת, לא היה צורך בברית חדשה. 8אולם העובדה היא שאלוהים עצמו הביע אי־שביעות רצונו מהברית הראשונה באמירתו:8‏.8 ח 8 ירמיהו לא 31‏-34

”הנה ימים באים, נאם ה׳,

וכרתי את בית ישראל

ואת בית־יהודה ברית חדשה.

9לא כברית אשר כרתי את אבותם

ביום החזיקי בידם להוצאם מארץ מצרים,

אשר המה הפרו את בריתי

ואנכי בעלתי (בחלתי) בם נאם ה׳.

10כי זאת הברית אשר אכרת את בית־ישראל

אחרי הימים ההם, נאם ה׳:

נתתי את תורתי בקרבם ועל לבם אכתבנה,

והייתי להם לאלוהים והמה יהיו לי לעם;

11ולא ילמדו עוד איש את רעהו

ואיש את אחיו לאמור:

דעו את ה׳, כי כולם ידעו אותי

למקטנם ועד גדולם נאם ה׳.

12כי אסלח לעוונם ולחטאתם לא אזכר עוד.“

13בהגדרתו ”ברית חדשה“ הוא קבע את התיישנות הברית הראשונה, ואם הברית הראשונה ישנה, הרי שהיא חולפת.

Hindi Contemporary Version

इब्री 8:1-13

महापुरोहित मसीह द्वारा आराधना

1बड़ी सच्चाई यह है: हमारे महापुरोहित वह हैं, जो स्वर्ग में महामहिम के दायें पक्ष में बैठे हैं, 2जो वास्तविक मंदिर में सेवारत हैं, जिसका निर्माण किसी मानव ने नहीं, स्वयं प्रभु ने किया है.

3हर एक महापुरोहित का चुनाव भेंट तथा बलि अर्पण के लिए किया जाता है. इसलिये आवश्यक हो गया कि इस महापुरोहित के पास भी अर्पण के लिए कुछ हो. 4यदि मसीह येशु पृथ्वी पर होते, वह पुरोहित हो ही नहीं सकते थे क्योंकि यहां व्यवस्था के अनुसार भेंट चढ़ाने के लिए पुरोहित हैं. 5ये वे पुरोहित हैं, जो स्वर्गीय वस्तुओं के प्रतिरूप तथा प्रतिबिंब मात्र की आराधना करते हैं, क्योंकि मोशेह को, जब वह तंबू का निर्माण करने पर थे, परमेश्वर के द्वारा यह चेतावनी दी गई थी: यह ध्यान रखना कि तुम तंबू का निर्माण ठीक-ठीक वैसा ही करो, जैसा तुम्हें पर्वत पर दिखाया गया था,8:5 निर्ग 25:40 6किंतु अब मसीह येशु ने अन्य पुरोहितों की तुलना में कहीं अधिक अच्छी सेवकाई प्राप्त कर ली है: अब वह एक उत्तम वाचा के मध्यस्थ भी हैं, जिसका आदेश उत्तम प्रतिज्ञाओं पर हुआ है.

7यदि वह पहली वाचा निर्दोष होती तो दूसरी की ज़रूरत ही न होती. 8स्वयं परमेश्वर ने उस पीढ़ी को दोषी पाकर यह कहा:

“यह देख लेना, वे दिन आ रहे हैं, यह याहवेह की वाणी है,

जब मैं इस्राएल वंश के साथ

तथा यहूदाह गोत्र के साथ

एक नयी वाचा स्थापित करूंगा.

9वैसी नहीं,

जैसी मैंने उनके पूर्वजों से उस समय की थी,

जब मैंने उनका हाथ

पकड़कर उन्हें मिस्र देश से बाहर निकाला था,

क्योंकि वे मेरी वाचा में स्थिर नहीं रहे,

इसलिये मैं उनसे दूर हो गया,

यह प्रभु का कहना है.

10किंतु मैं इस्राएल के लोगों के साथ यह वाचा बांधूंगा

यह प्रभु का कथन है उन दिनों के बाद

मैं अपना नियम उनके हृदय में लिखूंगा

और उनके मस्तिष्क पर अंकित कर दूंगा.

मैं उनका परमेश्वर हो जाऊंगा,

तथा वे मेरी प्रजा.

11तब हर एक व्यक्ति अपने पड़ोसी को शिक्षा नहीं देंगे, हर एक व्यक्ति अपने सजातीय को पुनः

यह नहीं कहेगा, ‘याहवेह को जान लो,’

क्योंकि वे सभी मुझे जान जाएंगे,

छोटे से बड़े तक,

यह याहवेह की वाणी है.

12क्योंकि मैं उनकी पापिष्ठता क्षमा कर दूंगा

तथा इसके बाद उनका पाप मैं पुनः स्मरण ही न करूंगा.”8:12 येरे 31:31-34

13जब परमेश्वर एक “नई” वाचा का वर्णन कर रहे थे, तब उन्होंने पहले को अनुपयोगी घोषित कर दिया. जो कुछ अनुपयोगी तथा जीर्ण हो रहा है, वह नष्ट होने पर है.