Knijga O Kristu

Matej 5:1-48

Propovijed na gori

(Lk 6:20-23)

1Kad Isus ugleda da se okupilo mnoštvo, popne se na goru i sjedne. Nato mu priđu njegovi učenici. 2On počne poučavati.

3“Blago onima koji shvaćaju da im je Bog potreban5:3 U grčkome: onima koji su ponizna duha, ili doslovce: siromašnima u duhu.

jer je njihovo nebesko kraljevstvo!

4Blago onima koji tuguju,

jer će ih Bog utješiti!

5Blago krotkima,

jer će baštiniti zemlju!

6Blago onima koji su gladni i žedni pravednosti,

jer će je se nasititi!

7Blago milosrdnima,

jer će se i njima iskazati milosrđe!

8Blago ljudima čista srca,

jer će gledati Boga!

9Blago mirotvorcima,

jer će se nazivati Božjom djecom!

10Blago onima koje progone zato što su pravedni pred Bogom,

jer je njihovo nebesko kraljevstvo!

11Blago vama kad vas zbog mene budu grdili i progonili i lažno vam pripisivali kojekakva zla! 12Radujte se zbog toga, silno se radujte! Jer velika vas nagrada čeka na nebesima. Tako su progonili i proroke prije vas!”

Sol i svjetlo

(Mk 9:50; Lk 11:33; 14:34-35)

13“Vi ste sol čovječanstvu5:13 U grčkome: sol zemlje.. Ali kakva je korist od soli ako obljutavi? Za što se može uporabiti? Ni za što, osim da se izbaci van, da ju ljudi pogaze.

14Vi ste svjetlost svijetu—grad na gori koji noću sjaji da ga svi vide. 15Svjetiljku ne palite da biste ju pokrili pod košaru, nego da biste ju postavili tako da svijetli svima u kući. 16Neka vaša svjetlost svijetli pred ljudima tako da vide vaša dobra djela i da slave vašega Oca koji je na nebesima.”

Isus poučava o Zakonu

(Lk 16:17)

17“Nemojte pogrešno shvatiti da sam došao ukinuti Zakon i zapise proroka. Nisam ih došao ukinuti, nego ispuniti. 18Zaista vam kažem: sve dok postoji nebo i zemlja, nijedno slovce, nijedan potez pera u Zakonu neće nestati dok se sve ne ostvari. 19Prekrši li zato tko i najmanju zapovijed i druge tome pouči, bit će najmanji u nebeskom kraljevstvu. Ali oni koji poučavaju Božjim zakonima i pokoravaju im se bit će veliki u nebeskom kraljevstvu. 20Kažem vam, ne bude li vaša pravednost veća od pravednosti pismoznanaca i farizeja, nipošto nećete ući u nebesko kraljevstvo!”

O srdžbi

(Lk 12:58-59)

21“Čuli ste da je starima rečeno u Zakonu: ‘Ne ubij! Tko ubije, mora biti izveden pred sud.’ 22A ja vam kažem: tko se rasrdi na svojeg brata, odgovarat će pred sudom! Nazove li ga glupanom, odgovarat će pred najvišim sudom. A nazove li ga luđakom, odgovarat će za to u paklenome ognju!

23Stojiš li, dakle, pred žrtvenikom u Hramu prinoseći žrtvu Bogu pa se iznenada sjetiš da neki tvoj brat ima što protiv tebe, 24ostavi žrtvu pred žrtvenikom pa se najprije pomiri s njime, a tek onda dođi i prinesi žrtvu Bogu.

25Brzo se nagodi s protivnikom, prije nego što bude kasno, dok te nije izveo pred sud, a sudac bacio u tamnicu. 26Zaista ti kažem, odande nećeš izići sve dok ne isplatiš sve do posljednjeg novčića!”

O preljubu

(Mt 18:8-9; Mk 9:43-48)

27“Čuli ste da u Zakonu piše: ‘Ne čini preljuba!’ 28A ja vam kažem: Tko samo i pogleda ženu s požudom, već je u svojem srcu s njom počinio preljub. 29Ako te tvoje desno oko navodi na grijeh, iskopaj ga i baci. Bolje ti je da samo jedan dio tvojeg tijela bude uništen nego da sav budeš bačen u pakao. 30Pa makar te i tvoja desna ruka navodila na grijeh, odsijeci ju i baci od sebe. Bolje da ostaneš bez jednoga od udova nego da ti cijelo tijelo ode u pakao.”

O rastavi

(Mt 19:9; Mk 10:11-12; Lk 16:18)

31“Također ste čuli: ‘Tko otpusti svoju ženu, neka joj dade otpusnicu.’5:31 Ponovljeni zakon 24:1. 32Ali ja vam kažem: Tko god se razvede od svoje žene, osim zbog njezina bluda, navodi ju na preljub. I tko god se oženi razvedenom ženom, čini preljub.”

O zakletvi

33“Čuli ste da u Zakonu piše: ‘Ne krši zakletve, nego izvrši ono na što si se Gospodinu zakleo.’5:33 Brojevi 30:2. 34A ja vam kažem: Ne kunite se nikako! Ni nebom, jer je Božje prijestolje, 35ni zemljom, jer je podnožje njegovim nogama, ni Jeruzalemom, jer je to grad velikoga kralja. 36Ne kunite se ni svojom glavom, jer ni jednu jedinu vlas niste u stanju učiniti bijelom ili crnom. 37Kad kažete: ‘Da’, neka to znači ‘da’, kad kažete: ‘Ne’, neka znači ‘ne’; sve što je više, dolazi od Zloga.”

O osveti

(Lk 6:29-30)

38“Čuli ste da u Zakonu piše: ‘Oko za oko, zub za zub!’5:38 Izlazak 21:24. 39A ja vam kažem: Ne opirite se zlotvoru! Pljusne li vas, naprotiv, tko po jednom obrazu, okrenite mu i drugi! 40Ako bi se tko htio s tobom parničiti da ti otme košulju, daj mu i svoj ogrtač. 41Primoraju li te rimski vojnici da im poneseš opremu jednu milju, ponesi ju dvije.5:41 Prema ondašnjem zakonu rimski su vojnici imali pravo to činiti. 42Zatraži li tko nešto od tebe, daj mu, i nemoj okrenuti leđa onome tko te zamoli da mu posudiš.”

O ljubavi prema neprijatelju

(Lk 6:27-28, 32-36)

43“Čuli ste da u Zakonu piše: ‘Ljubi svojega bližnjega, a mrzi neprijatelje!’ 44A ja vam kažem: Ljubite i svoje neprijatelje i molite se za one koji vas progone! 45Tako ćete se ponijeti kao prava djeca svojega nebeskog Oca, koji daje da njegovo sunce izlazi i nad zlima i nad dobrima te da kiša pada i pravednicima i nepravednicima. 46Jer ako volite samo one koji vas vole, kakvu nagradu možete očekivati? Ne čine li tako i ubirači poreza?5:46 Oni su u to doba bili omraženi u narodu zbog suradnje s okupatorskim vlastima i zbog toga što su iznuđivali novac od siromašnoga puka. 47Ako ste ljubazni samo prema svojoj braći, po čemu se razlikujete od drugih? To čine i neznabošci. 48Budite, dakle, savršeni kao što je savršen vaš nebeski Otac.”

New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

मत्ती 5:1-48

पहाड़ ऊपर यीसू के उपदेस

1जब यीसू ह मनखेमन के भीड़ ला देखिस, त ओह पहाड़ ऊपर चघके उहां बईठ गीस। तब ओकर चेलामन ओकर करा आईन, 2अऊ ओह ओमन ला ए कहिके उपदेस देवन लगिस:

3“धइन अंय ओमन, जऊन मन आतमा म दीन अंय,

काबरकि स्‍वरग के राज ओमन के अय।

4धइन अंय ओमन, जऊन मन सोक करथें,

काबरकि ओमन ला सांति दिये जाही।

5धइन अंय ओमन, जऊन मन नरम सुभाव के अंय,

काबरकि ओमन धरती के उत्तराधिकारी होहीं।

6धइन अंय ओमन, जऊन मन धरमीपन बर भूखन अऊ पीयासन हवंय,

काबरकि परमेसर ह ओमन ला संतोस करही।

7धइन अंय ओमन, जऊन मन दयालु अंय,

काबरकि ओमन के ऊपर दया करे जाही।

8धइन अंय ओमन, जऊन मन के हिरदय निरमल हवय,

काबरकि ओमन परमेसर के दरसन करहीं।

9धइन अंय ओमन, जऊन मन मेल-मिलाप कराथें,

काबरकि ओमन ला परमेसर के बेटा कहे जाही।

10धइन अंय ओमन, जऊन मन धरमीपन के कारन सताय जाथें,

काबरकि स्‍वरग के राज ओमन के अय।

11धइन अव तुमन, जब मनखेमन मोर कारन तुम्‍हर बेजत्ती करथें, तुमन ला सताथें अऊ झूठ-मूठ के, तुम्‍हर बिरोध म किसम-किसम के खराप बात कहिथें। 12आनंद मनावव अऊ खुस रहव, काबरकि स्‍वरग म तुम्‍हर बर बड़े इनाम रखे हवय। तुम्‍हर ले पहिली अगमजानीमन ला मनखेमन अइसनेच सताय रिहिन।”

नून अऊ अंजोर

(मरकुस 9:50; लूका 14:34-35)

13“तुमन धरती के नून अव। पर कहूं नून ह अपन सुवाद ला गंवा देथे, त फेर एला कोनो किसम ले नूनचूर नइं करे जा सकय। एह कोनो काम के नइं रहि जावय। एला बाहिर फटिक दिये जाथे अऊ एह मनखेमन के गोड़ तरी रउंदे जाथे।

14तुमन संसार के अंजोर अव। पहाड़ ऊपर बसे सहर ह छिपे नइं रह सकय। 15अऊ न तो मनखेमन दीया ला बारके कटोरा के तरी म रखथें, पर दीया ला दीवट ऊपर मढ़ाथें, जिहां ले एह घर के हर एक जन ला अंजोर देथे। 16ओही किसम ले, तुम्‍हर अंजोर ह मनखेमन के आघू म चमकय, ताकि ओमन तुम्‍हर बने काम ला देखंय अऊ स्‍वरग म रहइया तुम्‍हर ददा के बड़ई करंय।”

मूसा के कानून के पूरा होवई

17“ए झन सोचव कि मेंह मूसा के कानून या अगमजानीमन के बातमन ला खतम करे बर आय हवंव। मेंह ओमन ला खतम करे खातिर नइं, पर ओमन ला पूरा करे खातिर आय हवंव। 18मेंह तुमन ला सच कहत हंव कि जब तक स्‍वरग अऊ धरती हवय, तब तक मूसा के कानून के एक छोटे अकछर या बिन्दू घलो पूरा होय बिगर खतम नइं होवय। 19जऊन ह ए हुकूममन के छोटे ले छोटे बात ला घलो नइं मानय अऊ आने मन ला घलो अइसने करे बर सिखोथे, ओह स्‍वरग के राज म सबले छोटे समझे जाही, पर जऊन ह ए हुकूममन ला मानथे अऊ आने मन ला माने बर सिखोथे, ओह स्‍वरग के राज म बड़े समझे जाही। 20काबरकि मेंह तुमन ला कहत हवंव कि जब तक तुम्‍हर धरमीपन ह फरीसी अऊ कानून के गुरू मन के धरमीपन ले बढ़ के नइं होवय, तब तक तुमन स्‍वरग के राज म नइं जा सकव।”

हतिया अऊ गुस्सा

21“तुमन सुने हवव कि बहुंत पहिले मनखेमन ला ए कहे गे रिहिस, ‘हतिया झन करव, अऊ यदि कोनो हतिया करथे, त ओह कचहरी म दंड के भागी होही।’ 22पर मेंह तुमन ला कहत हंव कि यदि कोनो अपन भाई ऊपर गुस्सा करथे, त ओह दंड के भागी होही। जऊन कोनो अपन भाई के बेजत्ती करथे, त ओला धरम महासभा के आघू म जबाब देना पड़ही। पर जऊन कोनो अपन भाई ला कहिथे, ‘ए मुरुख!’ ओह नरक के आगी म पड़े के खतरा म होही।

23एकरसेति, यदि तेंह बेदी म अपन भेंट चघावत हस अऊ उहां तोला सुरता आथे कि तोर भाई के मन म तोर बिरोध म कुछू हवय, 24त उहां बेदी के आघू म अपन भेंट ला छोंड़ दे अऊ पहिली अपन भाई करा जा अऊ ओकर संग मेल-मिलाप कर, तब आ अऊ अपन भेंट ला चघा। 25ओ मनखे जऊन ह तोर बिरोध म अदालत जावत हे, ओकर संग जल्दी करके मेल-मिलाप कर ले। कचहरी जावत बेरा डहार म ही ओकर संग मेल-मिलाप कर ले, नइं तो ओह तोला नियायधीस ला सऊंप दिही, अऊ नियायधीस ह तोला पुलिस ला सऊंपही, अऊ तेंह जेल म डाल दिये जाबे। 26मेंह तोला सच कहत हंव कि जब तक तेंह कौड़ी-कौड़ी नइं चुका देबे, तब तक तेंह उहां ले छुटे नइं सकस।”

छिनारीपन

27“तुमन सुने हवव कि ए कहे गे रिहिस, ‘छिनारी झन करव।’ 28पर मेंह तुमन ला कहत हंव कि जऊन कोनो माईलोगन ला खराप नजर ले देखथे, त ओह अपन मन म ओकर संग छिनारी कर चुकिस। 29यदि तोर जेवनी आंखी ह तोर पाप म परे के कारन बनथे, त ओला निकारके फटिक दे। तोर बर एह बने अय कि अपन देहें के एक ठन अंग ला गंवा दे, पर तोर जम्मो देहें ह नरक म झन डारे जावय। 30अऊ कहूं तोर जेवनी हांथ ह तोर पाप म परे के कारन बनथे, त ओला काटके फटिक दे। तोर बर एह बने अय कि अपन देहें के एक ठन अंग ला गंवा दे, पर तोर जम्मो देहें ह नरक म झन चले जावय।”

तलाक

(मत्ती 19:9; मरकुस 10:11-12; लूका 16:18)

31“ए घलो कहे गे रिहिस, ‘जऊन कोनो अपन घरवाली ला छोंड़ देथे, त ओह ओला तियाग पतर जरूर देवय।’5:31 ब्यवस्था 24:1; मत्ती 19:3-9 32पर मेंह तुमन ला कहत हंव कि जऊन कोनो छिनारीपन के अलावा कोनो आने कारन ले अपन घरवाली ला छोंड़ देथे, त ओह ओकर छिनारी करे के कारन बनथे, अऊ जऊन ह ओ तियागे गय माईलोगन ले बिहाव करथे, त ओह घलो छिनारी करथे।”

किरिया

33“तुमन ए घलो सुने हवव कि बहुंत पहिले मनखेमन ला ए कहे गे रिहिस, ‘तुमन झूठ-मूठ के किरिया झन खावव, पर परभू के आघू म करे गे किरिया ला पूरा करव।’ 34पर मेंह तुमन ला कहत हंव कि किरिया कभू झन खावव; न तो स्‍वरग के काबरकि ओह परमेसर के सिंघासन अय; 35न तो धरती के, काबरकि एह परमेसर के गोड़ के चउकी अय; न तो यरूसलेम के, काबरकि ओह महाराजा के सहर अय। 36अऊ अपन मुड़ के घलो किरिया झन खावव, काबरकि तुमन एको ठन चुंदी ला घलो पंडरा या करिया नइं कर सकव। 37साफ-साफ तुम्‍हर गोठ ह हां के हां अऊ नइं के नइं होवय। एकर ले जादा जऊन कुछू होथे, ओह सैतान के तरफ ले होथे।”5:37 याकूब 5:12

बदला लेय के बारे म उपदेस

(लूका 6:29-30)

38“तुमन सुने हवव कि ए कहे गे रिहिस, ‘आंखी के बदला म आंखी अऊ दांत के बदला म दांत।’5:38 निरगमन 21:23-24 39पर मेंह तुमन ला कहत हंव कि दुस्‍ट मनखे के सामना झन करव। यदि कोनो तुम्‍हर जेवनी गाल म थपरा मारथे, त अपन डेरी गाल ला घलो ओकर अंग कर देवव। 40अऊ यदि कोनो तुम्‍हर ऊपर मुकदमा चलाके तुम्‍हर कुरता ला लेय चाहथे, त तुमन ओला अपन कोटी ला घलो लेवन दव। 41यदि कोनो तुमन ला जबरदस्‍ती एक मील ले जाथे, त तुमन ओकर संग दू मील चले जावव। 42जऊन ह तुम्‍हर ले मांगथे, ओला देवव, अऊ जऊन ह तुम्‍हर ले उधार मांगथे, ओला उधार देवव।”

बईरीमन बर मया

(लूका 6:27-28, 32-36)

43“तुमन सुने हवव कि ए कहे गे रिहिस, ‘अपन पड़ोसी ले मया, अऊ बईरीमन ले नफरत करव।’ 44पर मेंह तुमन ला कहत हंव कि अपन बईरीमन ले मया करव, अऊ जऊन मन तुम्‍हर ऊपर अतियाचार करथें, ओमन बर पराथना करव।5:44 निरगमन 23:4-5 45ताकि तुमन अपन स्वरगीय ददा के संतान बन जावव। ओह खराप अऊ बने दूनों मनखेमन ऊपर अपन सूरज चमकाथे, अऊ धरमी अऊ अधरमी दूनों के ऊपर पानी बरसाथे। 46यदि तुमन ओमन ला मया करथव, जऊन मन तुम्‍हर ले मया करथें, त तुमन ला का इनाम मिलही? लगान लेवइया पापीमन घलो अइसने करथें। 47यदि तुमन सिरिप अपन भाईमन ला ही जोहार करथव, त आने मन ले तुमन का बड़े बुता करथव? का आनजातमन घलो अइसने नइं करंय? 48एकरसेति, तुमन सिद्ध बनव, जइसने स्‍वरग म रहइया तुम्‍हर ददा ह सिद्ध अय।”