Knijga O Kristu

Matej 16:1-28

Vođe traže čudesni znak

(Mt 12:38-39; Mk 8:11-13; Lk 12:54-56)

1K Isusu dođu farizeji i saduceji. Da bi ga iskušali, zatraže da im pokaže kakav znak s neba.

2On odgovori: “Vi znate uvečer reći: Bit će lijepo vrijeme jer je nebo crveno. 3A ujutro kažete: Nebo je mutno i crveno—danas će nevrijeme. Izgled neba znate protumačiti, a znake vremena ne znate! 4Znak traži pokvaren i preljubnički naraštaj, ali neće dobiti drugoga znaka osim Jonina.” Zatim ih ostavi i ode.

Farizejski i saducejski kvasac

(Mk 8:14-21)

5Prelazeći na drugu stranu jezera, učenici zaborave ponijeti kruha. 6“Budite oprezni!” upozorio ih je Isus. “Čuvajte se farizejskog i saducejskog kvasca!”

7Oni su mislili da im to govori zato što su zaboravili ponijeti kruh.

8Isus je to opazio, pa im reče: “Slaba je vaša vjera! Što ste se zabrinuli jer nemate kruha? 9Zar još ne razumijete? Zar ste zaboravili onih pet kruhova na pet tisuća ljudi i koliko ste još košara skupili? 10I onih sedam kruhova na četiri tisuće ljudi i košare koje ste nakupili? 11Kako još ne shvaćate da vam ne govorim o kruhu kad kažem: ‘Čuvajte se kvasca farizejskoga i saducejskoga!’?”

12Oni tada shvate da im nije govorio o krušnome kvascu, već o farizejskome i saducejskome učenju.

Petar priznaje Krista

(Mk 8:27-30; Lk 9:18-21)

13Kad je Isus došao u krajeve Filipove Cezareje, upita učenike: “Što ljudi kažu, tko je Sin Čovječji?”

14“Neki kažu da je Ivan Krstitelj,” odgovore oni, “neki da je Ilija, a neki opet da je Jeremija ili koji drugi prorok.”

15Tada ih upita: “A za koga me vi držite?”

16Šimun Petar odgovori: “Ti si Krist, Mesija, Sin živoga Boga!”

17“Blago tebi, Šimune, sine Jonin”, reče mu Isus, “jer ti to nije objavio čovjek16:17 U grčkome: jer ti to nisu objavili tijelo i krv., nego moj Otac nebeski. 18A ja tebi kažem: ti si Petar; na toj stijeni izgradit ću svoju Crkvu i vrata paklenai sve sile pakla16:18 U grčkome: vrata Hada. neće ju nadvladati. 19I dat ću ti ključeve nebeskog kraljevstva; što god svežeš na zemlji, bit će svezano na nebesima, i što god odriješiš na zemlji, bit će odriješeno na nebesima.”

20Tada strogo zapovjedi učenicima da nikome ne kazuju kako je on Krist.

Isus navješćuje svoju smrt

(Mk 8:31-33; Lk 9:22)

21Otada Isus počne učenicima otvoreno govoriti o tome kako mora otići u Jeruzalem i ondje mnogo pretrpjeti od starješina, svećeničkih poglavara i pismoznanaca, te kako će ga ubiti i kako će on treći dan uskrsnuti.

22Petar ga nato povede na stranu i počne ga od toga odgovarati: “Ne daj Bože, Gospodine! Ne smije ti se takvo što dogoditi!”

23Isus se okrene prema Petru i reče: “Odlazi od mene, Sotono! Ti si mi zamka jer ne razmišljaš na Božji način, nego ljudski!”

Kako biti Kristovi učenici

(Mk 8:34—9:1; Lk 9:23-27)

24Tada Isus reče svojim učenicima: “Želi li tko biti mojim sljedbenikom, neka se odrekne samoga sebe, neka uzme svoj križ i neka ide za mnom. 25Jer svatko tko želi sačuvati svoj život izgubit će ga; a tko dade svoj život za mene, naći će ga. 26Kakva ti je korist ako stekneš sav svijet, a izgubiš vječni život? Što se može mjeriti s vrijednošću života?16:26 U grčkome: Ili što će čovjek dati u zamjenu za svoj život? 27Jer ću ja, Sin Čovječji, zaista doći u slavi svojega Oca s anđelima i tada ću suditi svakome prema njegovim djelima. 28Zaista vam kažem, neki među vama koji ste ovdje neće umrijeti prije nego što vide mene, Sina Čovječjega, kako dolazim u kraljevskoj vlasti.”

Hindi Contemporary Version

मत्तियाह 16:1-28

फ़रीसियों द्वारा अद्भुत चिह्न की मांग

1तब फ़रीसी और सदूकी येशु के पास आए और उनको परखने के लिए उन्हें कोई अद्भुत चिह्न दिखाने को कहा.

2येशु ने उनसे कहा,16:2 कुछ प्राचीनतम पाण्डुलिपियों मूल हस्तलेखों में पद 2 का शेष तथा सारे पद 3 नहीं पाया जाता. “सायंकाल होने पर तुम कहते हो कि मौसम अनुकूल रहेगा क्योंकि आकाश में लालिमा है. 3इसी प्रकार प्रातःकाल तुम कहते हो कि आज आंधी आएगी क्योंकि आकाश धूमिल है और आकाश में लालिमा है. तुम आकाश के स्वरूप को तो पहचान लेते हो किंतु वर्तमान समय के चिह्नों को नहीं! 4व्यभिचारी और परमेश्वर के प्रति निष्ठाहीन पीढ़ी चिह्न खोजती है किंतु इसे योनाह के चिह्न के अतिरिक्त और कोई चिह्न नहीं दिया जाएगा.” और येशु उन्हें वहीं छोड़कर चले गए.

गलत शिक्षा के प्रति चेतावनी

5झील की दूसरी ओर पहुंचने पर शिष्यों ने पाया कि वे अपने साथ भोजन रखना भूल गए थे. 6उसी समय येशु ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा, “फ़रीसियों और सदूकियों के खमीर से सावधान रहना.”

7इस पर शिष्य आपस में विचार-विमर्श करने लगे, “क्या प्रभु ने यह इसलिये कहा है कि हम भोजन साथ लाना भूल गए?”

8येशु उनकी स्थिति से अवगत थे, इसलिये उन्होंने शिष्यों से कहा, “अरे अल्पविश्वासियो! क्यों इस विवाद में उलझे हुए हो कि तुम्हारे पास भोजन नहीं है? 9क्या तुम्हें अब भी समझ नहीं आया? क्या तुम्हें पांच हज़ार के लिए पांच रोटियां याद नहीं? तुमने वहां शेष रोटियों से भरे कितने टोकरे उठाए थे? 10या चार हज़ार के लिए वे सात रोटियां, तुमने वहां शेष रोटियों से भरे कितने टोकरे उठाए थे? 11भला कैसे यह तुम्हारी समझ से परे है कि यहां मैंने भोजन का वर्णन नहीं किया है? परंतु यह कि मैंने तुम्हें फ़रीसियों और सदूकियों के खमीर से सावधान किया है.” 12तब उन्हें यह विषय समझ में आया कि येशु रोटी के खमीर का नहीं परंतु फ़रीसियों और सदूकियों की गलत शिक्षा का वर्णन कर रहे थे.

पेतरॉस की विश्वास-स्वीकृति

13जब येशु कयसरिया फ़िलिप्पी क्षेत्र में पहुंचे, उन्होंने अपने शिष्यों के सामने यह प्रश्न रखा: “लोगों के मत में मनुष्य के पुत्र कौन है?”

14शिष्यों ने उत्तर दिया, “कुछ के मतानुसार बपतिस्मा देनेवाला योहन, कुछ अन्य के अनुसार एलियाह और कुछ के अनुसार येरेमियाह या भविष्यद्वक्ताओं में से कोई एक.”

15तब येशु ने उनसे प्रश्न किया, “किंतु तुम्हारे मत में मैं कौन हूं?”

16शिमओन पेतरॉस ने उत्तर दिया, “आप ही मसीह हैं—जीवित परमेश्वर के पुत्र.”

17इस पर येशु ने उनसे कहा, “योनाह के पुत्र शिमओन, धन्य हो तुम! तुम पर इस सच का प्रकाशन कोई मनुष्य का काम नहीं परंतु मेरे पिता का है, जो स्वर्ग में हैं. 18मैं तुम पर एक और सच प्रकट कर रहा हूं: तुम पेतरॉस हो. अपनी कलीसिया का निर्माण मैं इसी पत्थर पर करूंगा. अधोलोक के फ़ाटक इस पर अधिकार न कर सकेंगे. 19तुम्हें मैं स्वर्ग-राज्य की कुंजियां सौंपूंगा. जो कुछ पृथ्वी पर तुम्हारे द्वारा इकट्ठा किया जाएगा, वह स्वर्ग में भी इकट्ठा होगा और जो कुछ तुम्हारे द्वारा पृथ्वी पर खुलेगा, वह स्वर्ग में भी खुलेगा.” 20इसके बाद येशु ने शिष्यों को सावधान किया कि वे किसी पर भी यह प्रकट न करें कि वही मसीह हैं.

दुःख-भोग और क्रूस की मृत्यु की पहली भविष्यवाणी

21इस समय से येशु ने शिष्यों पर यह स्पष्ट करना प्रारंभ कर दिया कि उनका येरूशलेम नगर जाना, पुरनियों, प्रधान पुरोहित और शास्त्रियों द्वारा उन्हें यातना दिया जाना, मार डाला जाना तथा तीसरे दिन मरे हुओं में से जीवित किया जाना अवश्य है.

22यह सुन पेतरॉस येशु को अलग ले गए और उन्हें झिड़की देते हुए कहने लगे, “परमेश्वर ऐसा न करें, प्रभु! आपके साथ ऐसा कभी न होगा.”

23किंतु येशु पेतरॉस से उन्मुख हो बोले, “दूर हो जा मेरी दृष्टि से, शैतान! तू मेरे लिए बाधा है! तेरा मन परमेश्वर संबंधित विषयों में नहीं परंतु मनुष्य संबंधी विषयों में है.”

24इसके बाद येशु ने अपने शिष्यों से कहा, “जो कोई मेरे पीछे आना चाहे, वह अपना स्वयं (अहम भाव) को त्यागकर अपना क्रूस उठाए और मेरे पीछे हो ले. 25जो कोई अपने जीवन को बचाना चाहता है, वह उसे गंवा देगा तथा जो कोई मेरे लिए अपने प्राणों की हानि उठाता है, उसे सुरक्षित पाएगा. 26भला इसका क्या लाभ कि कोई व्यक्ति पूरा संसार तो प्राप्त करे किंतु अपना प्राण खो दे? या किस वस्तु से मनुष्य अपने प्राण का अदला-बदली कर सकता है? 27मनुष्य का पुत्र अपने पिता की महिमा में अपने स्वर्गदूतों के साथ आएगा, तब वह हर एक मनुष्य को उसके कामों के अनुसार प्रतिफल देगा.

28“सच तो यह है कि यहां कुछ हैं, जो मृत्यु का स्वाद तब तक नहीं चखेंगे, जब तक वे मनुष्य के पुत्र का उसके राज्य में प्रवेश न देख लें.”