Knijga O Kristu

Marko 1:1-45

Uloga Ivana Krstitelja

(Mt 3:1-12; Lk 3:2-16; Iv 1:19-28)

1Ovo je početak Radosne vijesti o Božjemu Sinu Isusu Kristu. 2U Knjizi proroka Izaije Bog je rekao:

“Gledajte, šaljem pred vas svojega glasnika

i on će vam pripraviti put.1:2 Malahija 3:1.

3On je glas koji viče u pustinji:

‘Pripremite put za Gospodnji dolazak!

Poravnajte za njega staze!’”1:3 Izaija 40:3.

4Taj glasnik bio je Ivan Krstitelj. Živio je u pustinji i propovijedao kako se ljudi trebaju krstiti da pokažu kako su se odvratili od svojih grijeha i obratili se Bogu da im oprosti. 5Ljudi iz Jeruzalema i iz cijele Judeje putovali su k njemu u pustinju da ga vide i čuju. Ispovijedali su svoje grijehe, a on ih je krstio u rijeci Jordanu. 6Ivanova odjeća bila je istkana od devine dlake, a bio je opasan kožnim pojasom. Hranio se skakavcima i divljim medom. 7Propovijedao je: “Uskoro dolazi netko veći od mene, toliko velik da mu ja nisam dostojan ni robom biti.1:7 U grčkome: odvezati sandale. 8Ja vas krstim vodom, ali on će vas krstiti Svetim Duhom.”

Isusovo krštenje

(Mt 3:13-17; Lk 3:21-22; Iv 1:32-34)

9Jednog dana dođe Isus iz Nazareta u Galileji i Ivan ga krsti u rijeci Jordanu. 10Čim Isus iziđe iz vode, ugleda kako se otvaraju nebesa i kako Duh u obliku goluba silazi na njega. 11Začuje se glas: “Ti si moj ljubljeni Sin! Ti si moja radost!”

Isusove kušnje

(Mt 4:1-11; Lk 4:1-13)

12Odmah nakon toga Duh nagna Isusa da ode u pustinju. 13Tamo je ostao četrdeset dana i Sotona ga je kušao. Boravio je među divljim životinjama, a služili su mu anđeli.

Prvi učenici

(Mt 4:12-22; Lk 4:14-15; 5:2-11)

14Pošto je kralj Herod zatvorio Ivana, Isus ode u Galileju propovijedati Božju Radosnu vijest. 15“Napokon je došlo vrijeme,” naviještao je, “blizu je Božje kraljevstvo! Odvratite se od svojih grijeha i povjerujte Radosnoj vijesti!”

16Jednoga dana, prolazeći obalom Galilejskog jezera, opazi Šimuna i njegova brata Andriju kako mrežama hvataju ribu jer su po zanimanju bili ribari. 17Reče im: “Pođite za mnom i ja ću vas učiniti ribarima ljudi!”. 18Oni smjesta ostave svoje mreže te pođu za njim.

19Malo dalje uz obalu ugleda Zebedejeve sinove Jakova i Ivana kako u lađici krpaju mreže. 20Pozove i njih, a oni odmah ostave svojeg oca Zebedeja u lađi s nadničarima i pođu za njim.

Isus istjeruje nečistog duha

(Lk 4:31-37)

21Isus i njegovi sljedbenici stigoše u grad Kafarnaum. Odmah u subotu odu u sinagogu te je Isus ondje poučavao. 22Svi okupljeni bili su zadivljeni njegovim učenjem jer ih je poučavao kao onaj koji ima vlast, a ne kao pismoznanci.

23Tu se zatekao čovjek opsjednut nečistim duhom, koji počne vikati: 24“Zašto nas uznemiruješ, Isuse Nazarećanine? Zar si nas došao uništiti? Znam tko si: ti si Svetac Božji!”

25Isus mu zaprijeti: “Umukni i iziđi iz njega!” 26Nato on krikne, žestoko protrese čovjeka i iziđe iz njega.

27Svi nazočni silno se zaprepaste i počnu raspravljati o tome što se dogodilo. “Kakvo je to novo učenje?” uzbuđeno su pitali. “Ima takvu silnu vlast! Čak se i nečisti duhovi pokoravaju njegovim zapovijedima!” 28Vijest o tome što je učinio brzo se pronijela cijelom pokrajinom Galilejom.

Mnoga ozdravljenja

(Mt 8:14-17; Lk 4:38-41)

29Pošto iziđe iz sinagoge, Isus s Jakovom i Ivanom pođe u Šimunovu i Andrijinu kuću. 30Ondje je Šimunova punica ležala u velikoj vrućici te to odmah kazaše Isusu. 31On joj priđe, uhvati ju za ruku i podigne, a vrućica prestane. Žena stane ih posluživati.

32Uvečer, kad je sunce zašlo, dovedu mu sve bolesnike i opsjednute, 33pa se sav grad skupio pred vratima. 34Isus je iscijelio brojne bolesnike od najrazličitijih bolesti i brojnim zlodusima zapovjedio da iziđu iz svojih žrtava. Ali nije dopustio zlodusima da govore jer su znali tko je on.

Isus propovijeda u Galileji

(Lk 4:42-44)

35Drugog jutra ustao je prije zore, povukao se na pusto mjesto i ondje se molio. 36Šimun i ostali krenu ga potražiti. 37Kad ga pronađu, rekoše mu: “Svi te traže!”

38On im odgovori: “Hajdemo i dalje, u druga mjesta. I njima moram propovijedati poruku. Zbog toga sam došao!” 39Tako je proputovao cijelu Galileju propovijedajući po sinagogama i istjerujući zloduhe.

Isus iscjeljuje gubavca

(Mt 8:2-4; Lk 5:12-16)

40Jednom dođe k njemu neki gubavac, klekne pred njega i zamoli ga: “Ako hoćeš, možeš me iscijeliti!”

41Isus se sažali, ispruži ruku, dotakne ga i reče: “Hoću! Budi čist!” 42Gube odmah nestane i čovjek postane čist. 43Otpravljajući ga, Isus ga strogo upozori: 44“Nikome o tomu ne govori, već idi ravno svećeniku te sa sobom ponesi žrtveni dar prema Mojsijevu zakonu kao javno svjedočanstvo svojeg ozdravljenja.”

45Ali čovjek ode i počne svima govoriti što mu se dogodilo; zbog toga Isusa opkoli toliko mnoštvo da više nije mogao javno ući u bilo koji grad, već se morao zadržavati vani, na samotnim mjestima. A ljudi su stizali sa svih strana.

Hindi Contemporary Version

मार्का 1:1-45

बपतिस्मा देनेवाले योहन का उपदेश

1परमेश्वर-पुत्र1:1 कुछ हस्तलेखों में परमेश्वर-पुत्र शब्द नहीं पाए जाते. मला 3:1 येशु मसीह के सुसमाचार का आरंभ: 2भविष्यवक्ता यशायाह के अभिलेख के अनुसार,

“तुम्हारे पूर्व मैं अपना एक दूत भेज रहा हूं,

जो तुम्हारा मार्ग तैयार करेगा”1:2 मला 3:1;

3“जंगल में पुकारनेवाले की आवाज है,

‘प्रभु का रास्ता सीधा करो, उनका मार्ग सरल बनाओ.’ ”

4बपतिस्मा देनेवाले योहन जंगल में पाप क्षमा के लिए पश्चाताप के बपतिस्मा का प्रचार करते हुए आए. 5यहूदिया प्रदेश के क्षेत्रों से सारी भीड़ तथा येरूशलेम नगर के सभी लोग उनसे भेंट करने जाने लगे. ये सब पाप स्वीकार करते हुए यरदन नदी में योहन से बपतिस्मा ले रहे थे. 6योहन का परिधान, ऊंट के रोम से निर्मित वस्त्र और उसके ऊपर चमड़े का कमरबंध था और उनका भोजन था टिड्डियां तथा जंगलीमधु. 7वह प्रचार कर कहते थे, “मेरे बाद एक ऐसा व्यक्ति आएगा, जो मुझसे अधिक शक्तिमान हैं—मैं तो इस योग्य भी नहीं हूं कि उनके सामने झुककर उनकी जूतियों के बंध खोलूं. 8मैं बपतिस्मा जल में देता हूं; वह तुम्हें पवित्रात्मा में बपतिस्मा देंगे.”

मसीह येशु का बपतिस्मा

9उसी समय मसीह येशु गलील प्रदेश के नाज़रेथ नगर से आए और उन्हें योहन द्वारा यरदन नदी में बपतिस्मा दिया गया. 10जब मसीह येशु जल से बाहर आ रहे थे, उसी क्षण उन्होंने आकाश को खुलते तथा आत्मा को, जो कबूतर के समान था, अपने ऊपर उतरते हुए देखा 11और स्वर्ग से निकला एक शब्द भी सुनाई दिया: “तुम मेरे पुत्र हो—मेरे प्रिय—तुमसे में अतिप्रसन्न हूं.”

12उसी समय पवित्रात्मा ने उन्हें जंगल में भेज दिया. 13जंगल में वह चालीस दिन शैतान के द्वारा परखे जाते रहे. वह वहां जंगली पशुओं के साथ रहे और स्वर्गदूतों ने उनकी सेवा की.

प्रचार का प्रारंभ गलील प्रदेश से

14योहन के बंदी बना लिए जाने के बाद येशु, परमेश्वर के सुसमाचार का प्रचार करते हुए गलील प्रदेश आए. 15उनका संदेश था, “समय पूरा हो चुका है, परमेश्वर का राज्य पास आ गया है. मन फिराओ तथा सुसमाचार में विश्वास करो.”

पहले चार शिष्यों का बुलाया जाना

16गलील झील के पास से जाते हुए मसीह येशु ने शिमओन तथा उनके भाई आन्द्रेयास को देखा, जो झील में जाल डाल रहे थे. वे मछुआरे थे. 17मसीह येशु ने उनसे कहा, “मेरा अनुसरण करो—मैं तुम्हें मनुष्यों के मछुआरे बनाऊंगा.” 18वे उसी क्षण अपने जाल छोड़कर येशु का अनुसरण करने लगे.

19आगे जाने पर उन्होंने ज़ेबेदियॉस के पुत्र याकोब तथा उनके भाई योहन को देखा. वे भी नाव में थे और अपने जाल सुधार रहे थे. 20उन्हें देखते ही मसीह येशु ने उनको बुलाया. वे अपने पिता ज़ेबेदियॉस को मज़दूरों के साथ नाव में ही छोड़कर उनके साथ चल दिए.

मसीह येशु की अधिकार भरी शिक्षा

21वे सब कफ़रनहूम नगर आए. शब्बाथ पर मसीह येशु स्थानीय यहूदी सभागृह में जाकर शिक्षा देने लगे. 22लोग उनकी शिक्षा से आश्चर्यचकित रह गए क्योंकि वह शास्त्रियों के समान नहीं परंतु इस प्रकार शिक्षा दे रहे थे कि उन्हें इसका अधिकार है. 23उसी समय सभागृह में एक व्यक्ति, जो दुष्टात्मा से पीड़ित था, चिल्ला उठा, 24“नाज़रेथवासी येशु! क्या चाहते हैं आप? क्या आप हमें नाश करने आए हैं? मैं जानता हूं कि आप कौन हैं; परमेश्वर के पवित्र जन!”

25“चुप!” उसे फटकारते हुए मसीह येशु ने कहा, “बाहर निकल जा इसमें से!” 26उस व्यक्ति को मरोड़ते हुए वह प्रेत ऊंचे शब्द में चिल्लाता हुआ उसमें से बाहर निकल गया.

27सभी हैरान रह गए. वे आपस में विचार करने लगे, “यह सब क्या हो रहा है? यह अधिकारपूर्वक शिक्षा देते हैं और अशुद्ध आत्मा तक को आज्ञा देते है और वे उनका पालन भी करती हैं!” 28तेजी से उनकी ख्याति गलील प्रदेश के आस-पास सब जगह फैल गई.

पेतरॉस की सास को स्वास्थ्यदान

29यहूदी सभागृह से निकलकर वे सीधे याकोब और योहन के साथ शिमओन तथा आन्द्रेयास के घर पर गए. 30वहां शिमओन की सास बुखार में पड़ी हुई थी. उन्होंने बिना देर किए मसीह येशु को इसके विषय में बताया. 31मसीह येशु उनके पास आए, उनका हाथ पकड़ उन्हें उठाया और उनका बुखार जाता रहा तथा वह उनकी सेवा टहल में जुट गईं.

32संध्या समय सूर्यास्त के बाद लोग अस्वस्थ तथा जिनमें दुष्टात्माऐं थी उन लोगों को येशु के पास लाने लगे. 33सारा नगर ही द्वार पर इकट्ठा हो गया 34मसीह येशु ने विभिन्न रोगों से पीड़ित अनेकों को स्वस्थ किया और अनेक दुष्टात्माओं को भी निकाला. वह दुष्टात्माओं को बोलने नहीं देते थे क्योंकि वे उन्हें पहचानती थी.

समग्र गलील प्रदेश में मसीह येशु द्वारा प्रचार तथा स्वास्थ्यदान सेवा

35भोर होने पर, जब अंधकार ही था, मसीह येशु उठे और एक सुनसान जगह को गए. वहां वह प्रार्थना करने लगे. 36शिमओन तथा उनके अन्य साथी उन्हें खोज रहे थे. 37उन्हें पाकर वे कहने लगे, “सभी आपको खोज रहे हैं.”

38किंतु मसीह येशु ने उनसे कहा, “चलो, कहीं और चलें—यहां पास के नगरों में—जिससे कि मैं वहां भी प्रचार कर सकूं क्योंकि मेरे यहां आने का उद्देश्य यही है.” 39वह सारे गलील प्रदेश में घूमते हुए यहूदी सभागृहों में जा-जाकर प्रचार करते रहे तथा लोगों में से दुष्टात्माओं को निकालते गए.

कोढ़ रोगी की शुद्धि

40एक कोढ़ रोगी उनके पास आया. उसने मसीह येशु के सामने घुटने टेक उनसे विनती की, “आप चाहें तो मुझे शुद्ध कर सकते हैं.”

41तरस खाकर मसीह येशु ने हाथ बढ़ाकर उसे स्पर्श किया और कहा, “मैं चाहता हूं. तुम शुद्ध हो जाओ!” 42उसी समय उसका कोढ़ रोग जाता रहा और वह शुद्ध हो गया.

43मसीह येशु ने उसे उसी समय इस चेतावनी के साथ विदा किया, 44“सुनो! इस विषय में किसी से कुछ न कहना. हां, जाकर स्वयं को पुरोहित के सामने प्रस्तुत करो तथा अपनी शुद्धि के प्रमाण के लिए मोशेह द्वारा निर्धारित विधि के अनुसार शुद्धि संबंधी भेंट चढ़ाओ.” 45किंतु उस व्यक्ति ने जाकर खुलेआम इसकी घोषणा की तथा यह समाचार इतना फैला दिया कि मसीह येशु इसके बाद खुल्लम-खुल्ला किसी नगर में न जा सके और उन्हें नगर के बाहर सुनसान स्थानों में रहना पड़ा. फिर भी सब स्थानों से लोग उनके पास आते रहे.