Knijga O Kristu

Galaćanima 1:1-24

Pavlovi pozdravi

1Ovo je pismo od apostola Pavla. Nije me imenovala neka skupina ljudi ni ljudska vlast. Pozvao me sam Isus Krist i Bog Otac koji je Isusa podignuo od mrtvih. 2Svi ovdašnji kršćani također šalju pozdrav crkvama u Galaciji.

3Neka vam je milost i mir od našega Boga Oca i Gospodina Isusa Krista. 4Krist je umro za naše grijehe, baš kao što je Bog Otac bio i naumio, da nas spasi iz ovoga zlog svijeta u kojemu živimo. 5Zato sva slava pripada Bogu u vijekove vjekova. Amen.

Samo je jedno evanđelje

6Ne mogu se načuditi da se tako brzo odvraćate od Boga koji vas je pozvao u svojoj ljubavi i milosti u vječni život što ga daje kroz Krista. Vi već slijedite neki drugi put 7koji za sebe tvrdi da je Kristovo evanđelje, ali to nije. Prevarili su vas ljudi koji izvrću i mijenjaju istinu o Kristu.

8Ali neka je proklet svatko—pa bio to i ja ili čak anđeo s neba—tko vam navješćuje neko drugo evanđelje od onoga koje sam vam već navijestio. 9I ponavljam: neka je proklet svatko tko bi vam navješćivao neko drugo evanđelje osim onoga koje ste već prihvatili.

10Očito je da ne pokušavam ugoditi ljudima! Ne; trudim se ugoditi Bogu. Kad bih se još uvijek trudio ugađati ljudima, ne bih bio Kristov sluga.

Pavlovo evanđelje dolazi od Krista

11Draga braćo, hoću da znate kako evanđelje koje sam propovijedao nije ljudska predaja. 12Nisam ga primio ni naučio ni od kakva čovjeka, već od samoga Isusa Krista koji mi se objavio.

13Znate i sami kakav sam bio kao sljedbenik židovske religije—da sam proganjao Božju crkvu i htio ju zatrti. 14Bio sam među najrevnijim Židovima svojega naraštaja i svim silama se trudio slijediti očinske predaje svoje vjere.

15Ali kad se Bogu, koji me je odabrao i pozvao svojom milošću još prije mojega rođenja, svidjelo 16da mi objavi svojega Sina kako bih ga naviještao među poganima, nisam se savjetovao ni s kojim čovjekom 17niti sam išao u Jeruzalem k onima koji su prije mene bili apostoli, nego sam otišao u Arabiju pa se zatim vratio u Damask.

18Tek nakon tri godine otišao sam Petru1:18 U grčkome: Kefi. u Jeruzalem i ostao s njim petnaest dana. 19Od apostola tada nisam više nikoga vidio osim Jakova, brata našega Gospodina. 20Bog mi je svjedok da vam to ne lažem.

21Otišao sam zatim u sirijske i cilicijske krajeve. 22Kršćani u judejskim crkvama nisu me osobno poznavali. 23Čuli su samo da ljudi o meni govore: “Naš progonitelj sada propovijeda vjeru koju se trudio zatrti”, 24i slavili su Boga zbog mene.

Hindi Contemporary Version

गलातिया 1:1-24

1यह पत्र पौलॉस की ओर से है, जिसे न तो मनुष्यों की ओर से और न ही किसी मनुष्य की प्रक्रिया द्वारा परंतु मसीह येशु और पिता परमेश्वर द्वारा, जिन्होंने मसीह येशु को मरे हुओं में से जीवित किया, प्रेरित चुना गया 2तथा उन विश्वासियों की ओर से, जो इस समय मेरे साथ हैं,

गलातिया प्रदेश की कलीसियाओं के नाम में:

3हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु मसीह येशु की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शांति प्राप्त हो. 4मसीह येशु, जिन्होंने हमारे पापों के कारण स्वयं को इसलिये बलिदान कर दिया कि हमारे परमेश्वर और पिता की इच्छानुसार वह हमें वर्तमान बुरे संसार से छुड़ायें, 5उन्हीं की महिमा हमेशा होती रहे. आमेन.

एक चेतावनी

6मैं यह जानकर चकित हूं कि तुम परमेश्वर से, जिन्होंने मसीह के अनुग्रह के द्वारा तुम्हें बुलाया, इतनी जल्दी भटक कर एक अन्य ईश्वरीय सुसमाचार की ओर फिर गये हो 7पर वह दूसरा सुसमाचार जो वास्तव में ईश्वरीय सुसमाचार है ही नहीं! साफ़ तौर पर कुछ लोग हैं, जो मसीह के ईश्वरीय सुसमाचार को बिगाड़कर तुम्हें घबरा देना चाहते हैं. 8किंतु यदि हम या कोई स्वर्गदूत तक उस ईश्वरीय सुसमाचार के अलावा, जो हमने तुम्हें सुनाया है, किसी भिन्न ईश्वरीय सुसमाचार का प्रचार करे तो वह शापित है! 9जैसा हमने पहले भी कहा, मैं अब दोबारा कहता हूं: कि उस ईश्वरीय सुसमाचार के अलावा, जो हमने तुम्हें सुनाया, यदि कोई व्यक्ति तुम्हें अलग ईश्वरीय सुसमाचार सुनाए तो वह शापित है!

10किसका कृपापात्र बनने की कोशिश कर रहा हूं मैं—मनुष्यों का या परमेश्वर का? क्या मैं मनुष्यों को प्रसन्न करने के लिए प्रयास कर रहा हूं? यदि मैं अब तक मनुष्यों को ही प्रसन्न कर रहा होता तो मसीह का दास न होता.

पौलॉस द्वारा अपनी सेवा का बचाव और परमेश्वर द्वारा बुलाया जाना

11प्रियजन, मैं तुम पर यह स्पष्ट कर रहा हूं कि जो ईश्वरीय सुसमाचार मैंने तुम्हें सुनाया, वह किसी मनुष्य के दिमाग की उपज नहीं है. 12यह मुझे न तो किसी मनुष्य से और न ही किसी शिक्षा से, परंतु स्वयं मसीह येशु के प्रकाशन के द्वारा प्राप्त हुआ है.

13यहूदी मत के शिष्य के रूप में मेरी जीवनशैली कैसी थी, इसके विषय में तुम सुन चुके हो. मैं किस रीति से परमेश्वर की कलीसिया पर घोर अत्याचार किया करता था तथा उसे नाश करने के लिए प्रयास करता रहता था. 14यहूदी मत में अपने पूर्वजों की परंपराओं के प्रति अत्यंत उत्साही, मैं अपनी आयु के यहूदियों से अधिक उन्नत होता जा रहा था. 15किंतु परमेश्वर को, जिन्होंने माता के गर्भ से ही मुझे चुन लिया तथा अपने अनुग्रह के द्वारा मुझे बुलाया, यह सही लगा 16कि वह मुझमें अपने पुत्र को प्रकट करें कि मैं गैर-यहूदियों में उनका प्रचार करूं, इसके विषय में मैंने तुरंत न तो किसी व्यक्ति से सलाह ली 17और न ही मैं येरूशलेम में उनके पास गया, जो मुझसे पहले प्रेरित चुने जा चुके थे, परंतु मैं अराबिया क्षेत्र में चला गया और वहां से दोबारा दमिश्क नगर लौट गया.

18तीन वर्ष बाद, मैं कैफ़स से भेंट करने येरूशलेम गया और उनके साथ पन्द्रह दिन रहा. 19किंतु प्रभु के भाई याकोब के अलावा अन्य किसी प्रेरित से मेरी भेंट नहीं हुई. 20परमेश्वर के सामने मैं तुम्हें धीरज देता हूं कि अपने इस विवरण में मैं कुछ भी झूठ नहीं कह रहा.

21तब मैं सीरिया और किलिकिया प्रदेश के क्षेत्रों में गया. 22यहूदिया प्रदेश की कलीसियाओं से, जो अब मसीह में हैं, मैं अब तक व्यक्तिगत रूप से अपरिचित था. 23मेरे विषय में उन्होंने केवल यही सुना था: “एक समय जो हमारा सतानेवाला था, अब वही उस विश्वास का प्रचार कर रहा है, जिसे नष्ट करने के लिए वह दृढ़ संकल्प था.” 24उनके लिए मैं परमेश्वर की महिमा का विषय हो गया.