Chinese Contemporary Bible (Traditional)

詩篇 80:1-19

第 80 篇

為國家復興祈求

亞薩的詩,交給樂長,調用「作證的百合花」。

1-2以色列的牧者啊,

你像照顧羊群一樣帶領約瑟的子孫,

求你垂聽我們的祈禱。

坐在基路伯天使之上的耶和華啊,

求你向以法蓮便雅憫瑪拿西發出光輝,

求你施展大能來拯救我們。

3上帝啊,求你復興我們,

用你臉上的榮光照耀我們,

使我們得救。

4萬軍之上帝耶和華啊,

你因你子民的禱告而發怒,

要到何時呢?

5你使我們以淚洗面,

以哀傷果腹,

6又使我們成為鄰國爭奪的對象,

仇敵都嘲笑我們。

7萬軍之上帝啊,

求你復興我們,

用你臉上的榮光照耀我們,

使我們得救。

8你從埃及帶出一棵葡萄樹,

趕走外族人,把它栽種起來。

9你為它開墾土地,

它就扎根生長,佈滿這片土地。

10它的樹蔭遮蓋群山,

枝子遮蔽香柏樹。

11它的枝條延伸到地中海,

嫩枝伸展到幼發拉底河。

12你為何拆毀了它的籬笆,

讓路人隨意摘取葡萄呢?

13林中的野豬蹂躪它,

野獸吞吃它。

14萬軍之上帝啊,

求你回來,

求你在天上垂顧我們這棵葡萄樹,

15這棵你親手栽種和培育的葡萄樹。

16這樹被砍倒,被焚燒,

願你發怒毀滅仇敵。

17求你扶持你所揀選的人,你為自己所養育的人。

18我們必不再背棄你,

求你復興我們,

我們必敬拜你。

19萬軍之上帝耶和華啊,

求你復興我們,

用你臉上的榮光照耀我們,

使我們得救。

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 80:1-19

स्तोत्र 80

संगीत निर्देशक के लिये. “वाचा की कुमुदिनी” धुन पर आधारित. आसफ की रचना. एक स्तोत्र.

1इस्राएल के चरवाहे, हमारी सुनिए, आप ही हैं,

जो योसेफ़ की अगुवाई भेड़ों के वृन्द की रीति से करते हैं.

आप, जो करूबों के मध्य विराजमान हैं,

प्रकाशमान हों! 2एफ्राईम, बिन्यामिन तथा मनश्शेह

के सामने अपने सामर्थ्य को प्रगट कीजिए;

और हमारी रक्षा कीजिए.

3परमेश्वर, हमें हमारी पूर्व स्थिति प्रदान कीजिए;

हम पर अपना मुख प्रकाशित कीजिए,

कि हमारा उद्धार हो जाए.

4याहवेह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर,

कब तक आपकी प्रजा की प्रार्थनाओं के प्रति,

आपका कोप भीतर ही भीतर सुलगता रहेगा?

5आपने आंसुओं को उनका आहार बना छोड़ा है;

आपने उन्हें विवश कर दिया है, कि वे कटोरे भर-भर आंसू पिएं.

6आपने हमें अपने पड़ोसियों के लिए विवाद का कारण बना दिया है,

हमारे शत्रु हमारा उपहास करते हैं.

7सर्वशक्तिमान परमेश्वर, हमें हमारी पूर्व स्थिति प्रदान कर दीजिए;

हम पर अपना मुख प्रकाशित कीजिए,

कि हमारा उद्धार हो जाए.

8मिस्र देश से आप एक द्राक्षालता ले आए;

आपने राष्ट्रों को काटकर इसे वहां रोप दिया.

9आपने इसके लिए भूमि तैयार की.

इस लता ने जड़ पकड़ी और इसने समस्त भूमि आच्छादित कर दी.

10इसकी छाया ने तथा मजबूत देवदार की शाखाओं ने,

पर्वतों को ढंक लिया था.

11वह अपनी शाखाएं समुद्र तक,

तथा किशलय नदी तक फैलाए हुए था.

12आपने इसकी सुरक्षा की दीवारें क्यों ढाह दीं,

कि आते-जाते लोग इसके द्राक्षा तोड़ते जाएं?

13जंगली सूअर इसे निगल जाते,

तथा मैदान के पशु इसे अपना आहार बनाते हैं.

14सर्वशक्तिमान परमेश्वर, हम आग्रह करते हैं, आप लौट आइए!

स्वर्ग से दृष्टिपात कीजिए!

और इस ओर ध्यान दीजिए,

15और इस द्राक्षालता की हां उस पौधे की जिसे आपके दायें हाथ ने लगाया है,

तथा उस पुत्र को, जिसे आपने स्वयं सशक्त बनाया है, सोच लीजिए.

16आपकी इस द्राक्षालता को काट डाला गया है, इसे अग्नि में भस्म कर दिया गया है;

आपकी फटकार-मात्र आपकी प्रजा को नष्ट करने के लिए काफ़ी है.

17उस पुरुष पर आपके दायें हाथ का आश्वासन स्थिर रहे, जो आपके दायें पक्ष में उपस्थित है,

वह मनुष्य का पुत्रजिसे आपने अपने लिए तैयार किया है.

18तब हम आप से दूर न होंगे;

हमें जिलाइए, हम आपके ही नाम को पुकारेंगे.

19याहवेह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर, हमें पुनर्स्थापित कीजिए;

अपना मुख हम पर प्रकाशित कीजिए

कि हम सुरक्षित रहेंगे.