Chinese Contemporary Bible (Traditional)

但以理書 10:1-21

底格里斯河邊的異象

1波斯塞魯士執政第三年,但以理,又名伯提沙撒,得到啟示。這啟示是真實的,是關於一場大爭戰的事。但以理通過異象明白了啟示的意思。

2那時,我但以理悲傷了三個星期, 3期間沒有吃過美味,沒有嚐過酒肉,沒有抹過膏油。 4一月二十四日,我站在底格里斯河邊, 5舉目觀看,見有一個人身穿細麻衣,腰束純金的帶子, 6身體如碧玉,面貌如閃電,眼睛如火炬,四肢如明亮的銅,聲音如眾人的呼喊。 7只有我但以理看見了這異象,跟我在一起的人都沒有看見,但他們極其恐懼,紛紛逃匿, 8只剩下我一人觀看這奇異的景象。我渾身無力,臉色蒼白,精疲力盡。 9接著,我聽見他說話的聲音,一聽見他的聲音,我便俯伏在地上昏睡過去。 10忽然有一隻手輕拍我,扶我用膝和手掌支撐起身體。 11他對我說:「倍受眷愛的但以理啊,要留心聽我說,站起來吧,因為我是奉命到你這裡來的。」他說完這話,我便戰戰兢兢地站起來。 12他說:「但以理啊,不要怕,從你在上帝面前謙卑地懇求明白這異象的第一天,你的禱告已蒙垂聽。我是來答覆你的。 13波斯國的守護神攔阻我二十一日。由於我滯留在波斯諸王那裡,天使長米迦勒便來幫助我。 14我來是要使你明白將來你同胞的遭遇,因為這異象是關於將來的事。」 15他對我說話時,我低著頭,說不出話。 16後來,有一位樣子像人的用手摸我的嘴唇,我便開口對站在我面前的說:「我主啊,因為這異象,我痛苦不堪,毫無氣力。 17僕人我怎能跟我主說話?我現在渾身無力,沒有氣息。」

18於是,那位樣子像人的再次摸我,使我有力量。 19他對我說:「倍受眷愛的人啊,不要怕,願你平安!要剛強勇敢。」我聽到他的話,便有了力量,於是對他說:「我主啊,請說,因為你使我有了力量。」 20他說:「你知道我為什麼要到你這裡來嗎?現在我要回去與波斯的守護神爭戰。我離開後,希臘的守護神就會來。 21除了你們的守護天使米迦勒以外,誰也不能幫助我抵擋他們。我來是要把記錄在真理書上的事告訴你。

Hindi Contemporary Version

दानिएल 10:1-21

दानिएल का एक मनुष्य का दर्शन

1फारस के राजा कोरेश के शासनकाल के तीसरे साल में दानिएल (जिसे बैलशत्सर कहा जाता था) पर एक संदेश प्रकाशित किया गया. यह संदेश सत्य था और इसका संबंध एक बड़े युद्ध10:1 सत्य और कष्टकारक से था. संदेश का समझ उसके पास एक दर्शन में आया.

2उस समय, मैं, दानिएल, तीन सप्ताह तक शोक मनाता रहा. 3जब तक तीन सप्ताह पूरा न हो गया, तब तक, मैं कोई स्वादिष्ट भोजन न किया; न मांस खाया, न दाखमधु को मुंह से लगाया, और न ही किसी प्रकार के सौंदर्य प्रसाधन के सामग्री का उपयोग किया.

4पहले माह के चौबीसवें दिन, जब मैं महान नदी, हिद्देकेल के किनारे खड़ा था, 5तब मैंने देखा कि वहां एक व्यक्ति सन का वस्त्र पहने, कमर पर उपहाज़ देश का शुद्ध सोने का पट्टा बांधे खड़ा था. 6उसका शरीर ही फ़िरोजा के समान, उसका चेहरा बिजली के समान, उसकी आंखें जलती मशालो के समान, उसकी भुजा और पैर चमकते कांसे के किरण के समान, और उसकी आवाज एक जनसमूह के समान था.

7सिर्फ मुझे, दानिएल को, ही वह दर्शन दिखाई दे रहा था; जो लोग मेरे साथ थे, उन्हें वह नहीं दिखा, परंतु उन पर ऐसा आतंक छा गया कि वे वहां से भागकर छिप गए. 8इसलिये मैं अकेला रह गया, और इस बड़े दर्शन को टकटकी लगाकर देखता रहा; मुझमें कुछ बल न रहा, मेरा चेहरा पूरी तरह पीला पड़ गया और मैं निसहाय हो गया. 9तब मैंने उसे कहते हुए सुना, और जैसे कि मैंने उसकी बातों को सुना, मैं भूमि पर औंधे मुंह पड़ा गहरी नींद में चला गया.

10तब किसी के एक हाथ ने मुझे छुआ और मेरे थरथराते शरीर को मेरे हाथों और घुटनों के बल खड़ा कर दिया. 11उसने कहा, “हे दानिएल, तुम जो बहुत सम्मानीय व्यक्ति हो, जो बातें मैं तुम्हें बताने जा रहा हूं, उन बातों पर ध्यानपूर्वक विचार करो, और अब खड़े हो जाओ, क्योंकि मुझे तुम्हारे पास भेजा गया है.” जब उसने मुझसे यह कहा, मैं कांपता हुआ खड़ा हो गया.

12तब उसने मुझसे आगे कहा, “हे दानिएल, डरो मत. पहले ही दिन से, जब तुमने अपना मन, समझ प्राप्त करने और अपने परमेश्वर के सामने अपने आपको नम्र करने के लिये लगाया, तब से तुम्हारी बातें सुनी गईं, और इसी के प्रत्युत्तर में, मैं यहां आया हूं. 13परंतु फारस राज्य का राजकुमार इक्कीस दिन तक मेरा प्रतिरोध करता रहा. तब मुख्य राजकुमारों में से एक, मिखाएल, मेरी सहायता करने आया, क्योंकि मैं वहां फारस के राजा के पास रोका गया था. 14अब मैं तुम्हें वह बातें बताने आया हूं, जो भविष्य में तुम्हारे लोगों के साथ होनेवाला है, क्योंकि इस दर्शन का संबंध आनेवाले एक समय से है.”

15जब वह मुझसे यह कह रहा था, तो मैं ज़मीन की ओर चेहरा झुकाकर खड़ा रहा और कुछ बोल न सका. 16तब कोई जो एक मनुष्य की तरह दिख रहा था, मेरे ओंठों को छुआ, और मेरा मुंह खुल गया और मैं बातें करने लगा. मैंने उससे कहा जो मेरे सामने खड़ा था, “हे मेरे प्रभु, उस दर्शन के कारण, मैं पीड़ा से भर गया हूं, और मैं बहुत कमजोर महसूस कर रहा हूं. 17हे मेरे प्रभु, मैं, आपका सेवक, मैं आप से कैसे बात कर सकता हूं? मुझमें बल नहीं रहा और मैं बड़ी कठिनाई से सांस ले पा रहा हूं.”

18तब वह जो एक मनुष्य की तरह दिख रहा था, फिर से मुझे छुआ और मुझे बल दिया. 19उसने कहा, “मत डरो, तुम बहुत सम्मानीय व्यक्ति हो, तुम्हें शांति मिले! अब मजबूत रहो; दृढ़ रहो.”

जब उसने मुझसे बात की, तब मुझे बल मिला और मैंने उससे कहा, “हे मेरे प्रभु, मुझसे बातें करिये, क्योंकि आपने मुझे बल दिया है.”

20इसलिये उसने कहा, “क्या तुम जानते हो कि मैं तुम्हारे पास क्यों आया हूं? बहुत जल्दी, मैं लौटकर फारस के राजकुमार से लड़ाई करनेवाला हूं, और जब मैं जाऊंगा, तब यावन का राजकुमार आयेगा; 21पर पहले मैं तुम्हें यह बताऊंगा कि सत्य के किताब में क्या लिखा है. (तुम्हारे राजकुमार, मिखाएल को छोड़ और कोई भी इनसे लड़ने के लिये मेरी मदद नहीं करता.