Священное Писание

4 Царств 1:1-18

Пророк Ильяс и царь Охозия

1После смерти Ахава Моав взбунтовался против Исраила. 2Царь Охозия же упал через решётку своей верхней комнаты в Самарии и покалечился. Он отправил посланцев, сказав им:

– Идите и спросите Баал-Зевува1:2 Баал-Зевув – в Инджиле Иса Масих отождествляет этого бога (там он назван Баал-Зевулом) с самим сатаной, повелителем демонов (см. Мат. 10:25; 12:24-28)., бога филистимского города Экрона: оправлюсь ли я от этих увечий?

3Но Ангел Вечного1:3 Вечный – на языке оригинала: «Яхве». Под этим именем Всевышний открылся Мусе и народу Исраила (см. Исх. 3:13-15). См. пояснительный словарь. Ангел Вечного – этот особенный ангел отождествляется с Самим Вечным. Многие толкователи видят в Нём явления Исы Масиха до Его воплощения. То же в 19:35. сказал Ильясу из Тишбы:

– Пойди навстречу посланцам царя Самарии и спроси их: «Разве в Исраиле нет Бога, что вы идёте спрашивать Баал-Зевува, бога Экрона?» 4Итак, вот что говорит Вечный: «Ты не встанешь с постели, на которую лёг. Ты непременно умрёшь!»

И Ильяс пошёл.

5Посланцы же вернулись к царю, и он спросил их:

– Почему вы вернулись?

6– Нам навстречу вышел некий человек, – ответили они. – Он сказал нам: «Возвращайтесь к царю, который вас послал, и скажите ему: „Так говорит Вечный: Разве в Исраиле нет Бога, что ты посылаешь людей спрашивать Баал-Зевува, бога Экрона? Итак, ты не встанешь с постели, на которую лёг. Ты непременно умрёшь!“»

7Царь спросил их:

– Как выглядел тот человек, который вышел вам навстречу и сказал это?

8Они ответили:

– Он был одет в шкуры, с кожаным поясом на бёдрах.

Царь сказал:

– Это Ильяс из Тишбы.

9И он послал к Ильясу командира с его пятьюдесятью воинами. Тот поднялся к Ильясу, который сидел на вершине холма, и сказал ему:

– Пророк, царь говорит: «Спустись!»

10Но Ильяс ответил ему:

– Если я пророк, пусть огонь сойдёт с неба и пожрёт тебя и твоих людей!

И огонь, сойдя с неба, пожрал его и пятьдесят его воинов. 11Тогда царь послал к Ильясу другого пятидесятника с его людьми. Тот сказал Ильясу:

– Пророк, так говорит царь: «Немедленно спустись!»

12– Если я пророк, – ответил Ильяс, – пусть огонь сойдёт с неба и пожрёт тебя и твоих людей!

И огонь Всевышнего, сойдя с неба, пожрал его и пятьдесят его воинов. 13Тогда царь послал третьего пятидесятника с его людьми. Этот командир поднялся и пал на колени перед Ильясом.

– Пророк, – взмолился он, – прошу, пощади мою жизнь и жизнь этих пятидесяти воинов, твоих рабов! 14Ведь огонь, сошедший с небес, пожрал двух первых пятидесятников и их воинов. Пощади же мою жизнь!

15Ангел Вечного сказал Ильясу:

– Спустись с ним, не бойся его.

Тогда Ильяс встал и спустился с ним к царю. 16Он сказал царю:

– Так говорит Вечный: «Разве в Исраиле нет Бога, чтобы спрашивать Его? Ты отправлял посланцев спрашивать Баал-Зевува, бога Экрона! За это ты не встанешь с постели, на которую лёг. Ты непременно умрёшь!»

17И он умер, по слову Вечного, которое произнёс Ильяс. Так как у Охозии не было сына, вместо него на втором году правления иудейского царя Иорама, сына Иосафата, воцарился его брат Иорам.

18Прочие события царствования Охозии и то, что он сделал, записано в «Книге летописей царей Исраила».

Hindi Contemporary Version

2 राजा 1:1-18

एलियाह द्वारा आहाज़िया की मृत्यु की भविष्यवाणी

1अहाब की मृत्यु के बाद मोआब देश ने इस्राएल के विरुद्ध विद्रोह कर दिया. 2अहज़्याह शमरिया नगर में अपने राजघराने के ऊपरी कमरे की जालीदार खिड़की से नीचे गिर पड़ा और बीमार हो गया. तब उसने दूतों को बुलवाया और उन्हें यह आदेश दिया, “जाओ और बाल-ज़बूब, एक्रोन के देवता से यह मालूम करो, क्या मैं अपनी इस रोगी अवस्था से ठीक हो सकूंगा?”

3मगर याहवेह का दूत तिशबेवासी एलियाह से यह कह चुका था, “उठो, जाकर शमरिया के राजा के दूतों से भेंटकर उनसे कहना, ‘क्या इस्राएल राज्य में परमेश्वर नहीं हैं, कि तुम एक्रोन के देवता, बाल-ज़बूब से पूछताछ करने जा रहे हो?’ 4इसलिये अब याहवेह का संदेश यह है ‘अब तुम अपने बिछौने से, जिस पर तुम इस समय लेटे हुए हो, नीचे कभी न आ सकोगे—तुम्हारी मृत्यु तय है.’ ” यह सुन एलियाह चल पड़े.

5जब दूत राजा के पास लौटे, राजा ने उनसे प्रश्न किया, “तुम लौट क्यों आए हो?”

6उन्होंने उत्तर दिया, “एक व्यक्ति हमसे भेंट करने आया था, उसी ने हमें आदेश दिया, ‘राजा के पास लौट जाओ, जिसने तुम्हें भेजा है. उससे कहना, “यह याहवेह का संदेश है: क्या इस्राएल राज्य में परमेश्वर नहीं हैं, कि तुम एक्रोन के देवता, बाल-ज़बूब से पूछताछ करने जा रहे हो? इसलिये अब तुम जिस बिछौने पर लेटे हुए हो, उससे नीचे नहीं आओगे—तुम्हारी मृत्यु ज़रूर हो जाएगी!” ’ ”

7राजा ने उनसे पूछा, “किस प्रकार का व्यक्ति था वह, जो तुमसे भेंट करने आया था, जिसने तुमसे यह सब कहा है?”

8उन्होंने उत्तर दिया, “उसके शरीर पर घने बाल थे और वह चमड़े का कमरबंध बांधे हुए था.”

राजा बोल उठा, “वह तिशबेवासी एलियाह है!”

9राजा ने एक सेना के प्रधान को उसके पचासों सैनिकों के साथ एलियाह के पास भेज दिया. सेना के प्रधान ने वहां जाकर देखा कि एलियाह पहाड़ी की चोटी पर बैठे हुए थे. सेना के प्रधान ने एलियाह से कहा, “परमेश्वर के जन, राजा का आदेश है, ‘नीचे उतर आओ.’ ”

10एलियाह ने सेना के प्रधान को उत्तर दिया, “यदि मैं वास्तव में परमेश्वर का जन हूं, तो आकाश से आग बरसे और तुम्हें और तुम्हारे पचासों को खत्म कर जाए.” उनका यह कहना खत्म होते ही आकाश से आग बरसी और सेना के प्रधान और उसके पचासों सैनिकों को चट कर गई.

11राजा ने पचास सैनिकों की दूसरी टुकड़ी को उनके सेना के प्रधान के साथ एलियाह के पास भेजी. सेना के प्रधान ने एलियाह से कहा, “परमेश्वर के जन, यह राजा का आदेश है, ‘जल्द ही नीचे उतर आओ.’ ”

12एलियाह ने उसे उत्तर दिया, “यदि मैं सच में परमेश्वर का जन हूं, तो आकाश से आग बरसे और तुम्हें और तुम्हारे पचासों सैनिकों को चट कर जाए.” उसी समय आकाश से आग बरसी और उसे और उसके पचासों सैनिकों को चट कर गई.

13राजा ने पचास सैनिकों की तीसरी टुकड़ी को उनके सेना के प्रधान के साथ एलियाह के पास भेजी. जब वह तीसरी पचास सैनिकों की टुकड़ी का प्रधान एलियाह के पास पहुंचा, उसने उनके आगे घुटने टेक दिए और उनसे विनती की, “परमेश्वर के जन, आपकी दृष्टि में मेरा और इन पचास सैनिकों का जीवन कीमती बना रहे. 14आपके सामने आकाश से आग बरसी और मुझसे पहले आए दो सेना प्रधानों और उनके पचास-पचास सैनिकों को चट कर गई; मगर अब आपकी दृष्टि में मेरा जीवन कीमती हो.”

15एलियाह को याहवेह के दूत ने आदेश दिया, “निड़र हो उसके साथ चले जाओ.” तब एलियाह उठे और उसके साथ राजा के सामने जा पहुंचे.

16उन्होंने राजा को कहा, “याहवेह का संदेश यह है: आपने एक्रोन के देवता, बाल-ज़बूब से पूछताछ करने दूत भेजे थे, क्या इसलिये कि अब इस्राएल देश में कोई परमेश्वर न रहा, जिनसे उनकी इच्छा मालूम की जा सके? इसलिये आप जिस बिछौने पर लेटे हैं, उससे नीचे नहीं उतरेंगे—आपकी मृत्यु ज़रूर ही हो जाएगी!”

इस्राएल पर येहोराम का शासन

17तब याहवेह की भविष्यवाणी के अनुसार, जो उन्होंने एलियाह के द्वारा की थी, अहज़्याह की मृत्यु हो गई. इसलिये कि अहज़्याह के कोई पुत्र न था, उसकी जगह पर येहोराम राजा बन गया. यह यहूदिया के राजा यहोशाफ़ात के पुत्र येहोराम के शासनकाल का दूसरा साल था. 18अहज़्याह द्वारा किए गए बाकी कामों का ब्यौरा इस्राएल के राजाओं की इतिहास नामक पुस्तक में दिया गया है.