Священное Писание

Матай 28:1-20

Воскресение Исы Масиха

(Мк. 16:1-8; Лк. 24:1-12; Ин. 20:1-18)

1После субботы, на рассвете первого дня недели28:1 У иудеев неделя начиналась с воскресенья., Марьям из Магдалы и другая Марьям пошли посмотреть на могильную пещеру. 2Вдруг произошло сильное землетрясение, потому что ангел от Вечного спустился с неба, подошёл к могильной пещере и отвалил камень. И теперь он сидел на нём. 3Лицо его излучало сияние, подобное молнии, а его одежда была белой, как снег. 4Стражники настолько испугались его, что задрожали и стали как мёртвые.

5Ангел сказал женщинам:

– Не бойтесь, я знаю, что вы ищете распятого Ису. 6Его здесь нет, Он воскрес, как и говорил ранее. Подойдите и посмотрите на место, где Он лежал. 7Идите же скорее и скажите Его ученикам, что Он воскрес из мёртвых и отправился прежде вас в Галилею. Там вы Его и увидите. Запомните то, что я вам сказал.

8Женщины ушли от могилы испуганные, но в то же время очень обрадованные. Они побежали, чтобы поскорее рассказать обо всём ученикам Исы. 9Вдруг их встретил Сам Иса.

– Приветствую вас, – сказал Он.

Они подошли, обняли Его ноги и поклонились Ему. 10Тогда Иса сказал им:

– Не бойтесь. Идите и скажите Моим братьям (ученикам), чтобы они шли в Галилею. Там они Меня и увидят.

Религиозные вожди подкупают стражу

11Женщины ещё были в пути, когда несколько человек из стражи пришли в город и рассказали обо всём главным священнослужителям. 12Главные священнослужители посовещались со старейшинами и разработали план. Они дали солдатам много денег 13и сказали:

– Говорите всем так: «Его ученики пришли ночью и выкрали тело, пока мы спали». 14А если это дойдёт до наместника, то мы с ним поговорим и тем вас избавим от неприятностей.

15Солдаты взяли деньги и поступили так, как их научили. И эта выдумка распространена среди отвергающих Ису иудеев и по сегодняшний день.

Великое поручение

16А одиннадцать учеников пошли в Галилею, на гору, куда Иса велел им прийти. 17Там они увидели Ису и поклонились Ему, однако некоторые засомневались, что это Он. 18Тогда, подойдя, Иса сказал им:

– Мне дана вся власть на небе и на земле. 19Поэтому пойдите ко всем народам и сделайте их Моими учениками, совершая над ними обряд погружения в воду28:19 Или: «обряд омовения». в знак единения с Отцом, Сыном и Святым Духом28:19 Букв.: «во имя Отца, Сына и Святого Духа». Слово «имя» стоит в единственном числе, что говорит об одном, триедином Боге, а не о трёх богах., и 20учите их исполнять всё, что Я вам повелел. А Я буду с вами всегда, до скончания века.

Hindi Contemporary Version

मत्तियाह 28:1-20

येशु का पुनरुत्थान

1शब्बाथ के बाद, सप्ताह के पहले दिन, जब भोर हो ही रही थी, मगदालावासी मरियम तथा वह अन्य मरियम, येशु की कंदरा-क़ब्र पर आईं.

2उसी समय एक बड़ा भूकंप आया क्योंकि प्रभु का एक स्वर्गदूत स्वर्ग से प्रकट हुआ था. उसने कब्र के प्रवेश से पत्थर लुढ़काया और उस पर बैठ गया. 3उसका रूप बिजली-सा तथा उसके कपड़े बर्फ के समान सफ़ेद थे. 4पहरुए उससे भयभीत हो मृतक के समान हो गए.

5स्वर्गदूत ने उन स्त्रियों को संबोधित किया, “मत डरो! मुझे मालूम है कि तुम क्रूस पर चढ़ाए गए येशु को खोज रही हो. 6वह यहां नहीं हैं क्योंकि वह मरे हुओं में से जीवित हो गए हैं—ठीक जैसा उन्होंने कहा था. स्वयं आकर उस स्थान को देख लो, जहां उन्हें रखा गया था. 7अब शीघ्र जाकर उनके शिष्यों को यह सूचना दो कि वह मरे हुओं में से जीवित हो गए हैं. और हां, वह तुम लोगों से पूर्व गलील प्रदेश जा रहे हैं. तुम उन्हें वहीं देखोगी. याद रखना कि मैंने तुमसे क्या-क्या कहा है.”

8वे वहां से भय और अत्यंत आनंद के साथ जल्दी से शिष्यों को इसकी सूचना देने दौड़ गईं. 9मार्ग में ही सहसा येशु उनसे मिले और उनका अभिनंदन किया. उन्होंने उनके चरणों पर गिरकर उनकी वंदना की. 10येशु ने उनसे कहा, “डरो मत! मेरे भाइयों तक यह समाचार पहुंचा दो कि वे गलील प्रदेश को प्रस्थान करें, मुझसे उनकी भेंट वहीं होगी.”

यहूदी अगुवों का प्रहरियों को घूस देना

11वे जब मार्ग में ही थी, कुछ प्रहरियों ने नगर में जाकर प्रधान पुरोहितों को इस घटना की सूचना दी. 12उन्होंने पुरनियों को इकट्ठा कर उनसे विचार-विमर्श किया और पहरुओं को बड़ी धनराशि देते हुए उन्हें यह आज्ञा दी, 13“तुम्हें यह कहना होगा, ‘रात में जब हम सो रहे थे, उसके शिष्य उसे चुरा ले गए.’ 14यदि राज्यपाल को इसके विषय में कुछ मालूम हो जाए, हम उन्हें समझा लेंगे और तुम पर कोई आंच न आने देंगे.” 15धनराशि लेकर पहरुओं ने वही किया जो उनसे कहा गया था. यहूदियों में यही धारणा आज तक प्रचलित है.

महान आयोग

16ग्यारह शिष्यों ने गलील को प्रस्थान किया. वे येशु द्वारा पहले से बताए हुए पर्वत पर पहुंचे. 17उन्होंने वहां येशु को देखा और उनकी वंदना की परंतु कुछ को अभी भी संदेह था. 18येशु ने पास आकर उनसे कहा, “सारा अधिकार—स्वर्ग में तथा पृथ्वी पर—मुझे दिया गया है. 19इसलिये यहां से जाते हुए तुम सारे राष्ट्रों को मेरा शिष्य बनाओ और उन्हें पिता, पुत्र और पवित्रात्मा के नाम में बपतिस्मा दो. 20उन्हें इन सभी आदेशों का पालन करने की शिक्षा दो, जो मैंने तुम्हें दिए हैं. याद रखो: जगत के अंत तक मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं.”