Священное Писание

Исход 1:1-22

Угнетённые исраильтяне

1Вот имена сыновей Исраила (он же Якуб), которые пришли с ним в Египет, каждый со своей семьёй: 2Рувим, Шимон, Леви и Иуда, 3Иссахар, Завулон и Вениамин, 4Дан и Неффалим, Гад и Ашир. 5Всех потомков Якуба было семьдесят. Юсуф уже был в Египте.

6Со временем Юсуф и его братья умерли, как и всё их поколение. 7Но исраильтяне рожали много детей, их становилось всё больше и больше, и их народ стал таким многочисленным, что они расселились по всей земле Египта.

8Прошло время, и к власти в Египте пришёл новый фараон, который ничего не знал о Юсуфе. 9Он сказал своему народу:

– Смотрите, исраильтяне становятся многочисленнее и сильнее нас. 10Давайте поступим мудро. Если исраильтян станет ещё больше, и случится война, они присоединятся к нашим врагам, выступят против нас и покинут страну.

11Египтяне поставили над исраильтянами надсмотрщиков, чтобы изнурять их подневольным трудом. Исраильтяне построили фараону Питом и Раамсес – города для хранения припасов. 12Но чем больше исраильтян угнетали, тем больше их становилось, и они расселялись так, что египтяне начали бояться исраильтян 13и потому безжалостно принуждали их трудиться. 14Они сделали их жизнь горькой, заставляя делать кирпичи из глины, заниматься строительством, а также работать в поле. Исраильтян безо всякой жалости заставляли делать всю эту тяжёлую работу.

15Царь Египта сказал еврейским повитухам, которых звали Шифра и Пуа:

16– Когда вы будете принимать роды у еврейских женщин, то будьте внимательны: если родится мальчик – убивайте его, а если девочка – оставляйте в живых.

17Но повитухи боялись Всевышнего и не исполняли приказ египетского царя. Они оставляли мальчиков в живых. 18Царь Египта вызвал повитух и спросил:

– Зачем вы это делаете? Зачем оставляете мальчиков в живых?

19Повитухи ответили фараону:

– Еврейские женщины не такие, как египетские: они крепкие и рожают ещё до нашего прихода.

20За это Всевышний был милостив к повитухам, а народ продолжал увеличиваться и стал ещё многочисленнее. 21За то, что повитухи боялись Всевышнего, Он даровал им в награду семьи и детей. 22Тогда фараон приказал своему народу:

– Каждого мальчика, который рождается у евреев, бросайте в реку Нил, а девочек оставляйте в живых.

Hindi Contemporary Version

निर्गमन 1:1-22

मिस्र देश से इस्राएल का निकलना

1याकोब के साथ मिस्र में अपने-अपने घराने के साथ आकर रहनेवाले इस्राएलियों के नाम निम्नलिखित हैं:

2रियूबेन, शिमओन, लेवी और यहूदाह;

3इस्साकार, ज़ेबुलून तथा बिन्यामिन;

4दान एवं नफताली;

गाद एवं आशेर.

5याकोब के वंश में सत्तर जन थे, योसेफ़ पहले ही मिस्र में थे.

6वहां योसेफ़ और उनके सभी भाई तथा पूरी पीढ़ी के लोगों की मृत्यु हो गई थी 7इस्राएली बहुत फलवंत थे और वे बढ़ते चले गए, और बहुत सामर्थ्यी होकर पूरे देश में भर गए.

8फिर मिस्र में एक नया राजा बना, जो योसेफ़ को नहीं जानता था. 9उसने अपनी प्रजा से यह कहा, “इस्राएल के लोग संख्या में और बल में हमसे अधिक है. 10इसलिये हम समझदारी से रहें, ये लोग तो बढ़ते जाएंगे ऐसा न हो कि युद्ध की स्थिति में हमारे शत्रुओं के साथ मिलकर, हमसे ही युद्ध करने लगें और देश छोड़कर चले जाएं.”

11इस विचार से उन्होंने इस्राएलियों को कड़ी मेहनत कराने के उद्देश्य से ठेकेदार नियुक्त कर दिए. तब फ़रोह के लिए पिथोम तथा रामेसेस नगर बनाए. 12जितना इस्राएलियों को कष्ट दिया गया, उतने ही वे बढ़ते और देश में फैलते गए, इसलिये इस्राएली मिस्रवासियों के लिए डर का कारण बन गये. 13मिस्री इस्राएलियों से कठोर मेहनत कराते रहे. 14इस प्रकार मिस्रियों ने इस्राएलियों के जीवन को दुखी कर दिया. उन्हें गारे तथा ईंट के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती थी. सभी कामों में उन्हें दुखी कर सताया जाता था.

15यह देख मिस्र देश के राजा ने इब्री धायों को बुलवाया. इनमें एक का नाम शिफ्राह तथा दूसरी का पुआह था. 16राजा ने उनसे कहा कि, “इब्री स्त्रियों का प्रसव कराते समय जैसे ही तुम्हें यह पता चले कि लड़का है, तुम उसकी हत्या कर देना; किंतु यदि वह पुत्री हो, तो उसे जीवित रहने देना.” 17किंतु धायें परमेश्वर का भय मानने वालीं थी. इस कारण उन्होंने राजा कि बात नहीं मानी; वे पुत्रों को जीवित छोड़ती चली गईं. 18इसलिये राजा ने धायों को बुलवाया और उनसे पूछा, “तुम ऐसा क्यों कर रही हो? क्यों लडकों को जीवित छोड़ रही हो?”

19उन्होंने फ़रोह को उत्तर दिया, “इब्री स्त्रियां मिस्री स्त्रियों के समान नहीं होती; वे हृष्ट-पुष्ट होती हैं, इसलिये हमारे पहुंचने से पहले ही प्रसव कर चुकी होती हैं.”

20इस कारण परमेश्वर की दया उन धायों पर बनी रही, इस्राएली बढ़ते और शक्तिशाली होते गए. 21धायों के मन में परमेश्वर का भय था, इस कारण परमेश्वर ने उनको अपने परिवार दिये.

22फिर फ़रोह ने सब लोगों से कहा कि “हर नवजात पुत्र को, जो तुम्हारे आस-पास जन्म लेता है, उन्हें नील नदी में फेंक दिया करना, किंतु पुत्री को जीवित रहने देना.”