Забур 91 CARS - स्तोत्र 91 HCV

Священное Писание

Забур 91:1-16

Песнь 91

1Песнопение на празднование субботы91:1 Суббота – седьмой день недели у иудеев, день, посвящённый Вечному. В этот день, согласно повелению Вечного, исраильский народ отдыхал и совершал ритуальные жертвоприношения (см. Исх. 31:12-17; Чис. 28:9-10)..

2Хорошо славить Вечного

и воспевать имя Твоё, Высочайший,

3возглашать милость Твою утром

и верность Твою вечером,

4играть на десятиструнной лире

и на мелодичной арфе.

5Ведь Ты, Вечный, обрадовал меня Своими деяниями;

я ликую о делах Твоих рук.

6Как велики Твои дела, Вечный,

и как глубоки Твои помышления!

7Глупый человек не знает,

и невежда не понимает их.

8Хотя нечестивые возникают, как трава,

и злодеи процветают,

они исчезнут навеки.

9Ты же, Вечный, навеки превознесён!

10Подлинно враги Твои, Вечный,

подлинно враги Твои погибнут;

все злодеи будут рассеяны.

11А меня ты сделаешь сильным, подобно быку91:11 Букв.: «Мой рог Ты вознесёшь, словно рог быка». Рог был символом могущества, власти и силы.,

и умастишь меня свежим маслом.

12Глаза мои видели поражение врагов моих,

и уши мои слышали падение злодеев, восстающих на меня.

13А праведники цветут, словно пальма,

возвышаются, как кедр на Ливане.

14Посаженные в доме Вечного,

они зацветут во дворах храма нашего Бога.

15И в старости они будут плодовиты,

сочны и свежи,

16чтобы возвещать, что праведен Вечный, Скала моя,

и нет в Нём неправды.

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 91:1-16

स्तोत्र 91

1वह, जिसका निवास सर्वोच्च परमेश्वर के आश्रय में है,

सर्वशक्तिमान के छाया कुंज में सुरक्षित निवास करेगा.

2याहवेह के विषय में मेरी घोषणा है, “वह मेरे आश्रय, मेरे गढ़ हैं,

मेरे शरण स्थान परमेश्वर है, जिनमें मेरा भरोसा है.”

3वह तुम्हें सभी फंदे से बचाएंगे,

वही घातक महामारी

से तुम्हारी रक्षा करेंगे.

4वह तुम्हें अपने परों में छिपा लेंगे,

उनके पंखों के नीचे तुम्हारा आश्रय होगा;

उनकी सच्चाई ढाल और गढ़ हैं.

5तुम न तो रात्रि के आतंक से भयभीत होगे,

न ही दिन में छोड़े गए बाण से,

6वैसे ही न उस महामारी से, जो अंधकार में छिपी रहती है,

अथवा उस विनाश से, जो दिन-दोपहरी में प्रहार करता है.

7संभव है कि तुम्हारे निकट हजार

तथा तुम्हारी दायीं ओर दस हजार आ गिरें,

किंतु वह तुम तक नहीं पहुंचूंगा.

8तुम स्वयं अपने आंखों से देखते रहोगे

और देखोगे कि कैसा होता है कुकर्मियों का दंड.

9याहवेह, आप, जिन्होंने सर्वोच्च स्थान को अपना निवास बनाया है,

“मेरे आश्रय हैं.”

10कोई भी विपत्ति तुम पर आने न पाएगी

और न कोई विपत्ति ही तुम्हारे मंडप के निकट आएगी.

11क्योंकि वह अपने स्वर्गदूतों को तुम्हारी हर एक

गतिविधि में तुम्हारी सुरक्षा का आदेश देंगे;

12वे तुम्हें अपने हाथों में उठा लेंगे,

कि कहीं तुम्हारे पांव को पत्थर से ठोकर न लग जाए.

13तुम सिंह और नाग को कुचल दोगे;

तुम पुष्ट सिंह और सर्प को रौंद डालोगे.

14यह याहवेह का आश्वासन है, “मैं उसे छुड़ाऊंगा, क्योंकि वह मुझसे प्रेम करता है;

मैं उसे सुरक्षित रखूंगा, क्योंकि उसने मेरी महिमा पहचानी है.

15जब वह मुझे पुकारेगा, मैं उसे उत्तर दूंगा;

संकट की स्थिति में मैं उसके साथ रहूंगा,

उसे छुड़ाकर मैं उसका सम्मान बढ़ाऊंगा.

16मैं उसे दीर्घायु से तृप्त करूंगा

और मैं उसे अपनी उद्धार का अनुभव कराऊंगा.”