Забур 85 CARS - स्तोत्र 85 HCV

Священное Писание

Забур 85:1-17

Песнь 85

Молитва Давуда.

1Вечный, услышь меня и ответь,

ведь я беден и нищ.

2Сохрани мою жизнь,

ведь я Тебе верен.

Ты – мой Бог;

спаси Своего раба,

надеющегося на Тебя.

3Владыка, помилуй меня,

ведь я к Тебе взываю весь день.

4Даруй радость рабу Твоему,

ведь я к Тебе, Владыка, возношу душу мою.

5Владыка, Ты благ и готов прощать,

богат любовью ко всем, кто призывает Тебя.

6Вечный, молитву мою услышь;

внемли мольбе моей о милости.

7В день беды моей я к Тебе взываю,

потому что Ты ответишь мне.

8Владыка, нет подобного Тебе среди богов,

нет дел подобных Твоим.

9Все народы, которые Ты создал,

придут и поклонятся пред Тобою, Владыка,

и восславят имя Твоё,

10потому что Ты велик и творишь чудеса;

Ты – Бог, только Ты!

11Вечный, научи меня пути Своему,

и буду ходить в истине Твоей.

Дай мне сердце, полностью преданное Тебе,

чтобы мне жить в страхе перед Тобой.

12Восхвалю Тебя, Владыка, мой Бог, всем сердцем своим;

имя Твоё буду славить вечно,

13потому что велика милость Твоя ко мне;

Ты избавил душу мою от глубин мира мёртвых.

14Всевышний, гордецы восстали против меня,

сборище негодяев ищет моей смерти –

те, кто не думает о Тебе.

15Но Ты, Владыка, Бог милостивый и милосердный85:15 Бог милостивый и милосердный – это выражение основано на словах из Таурата (см. Исх. 34:6) и является родственным арабскому выражению: «бисмиллях-ир-рахман-ир-рахим», что переводится как: «Во имя Аллаха милостивого и милосердного». В доисламской Аравии христиане государства Набатея использовали похожее выражение, переняв его из иудейской традиции.,

долготерпеливый, богатый любовью и верностью.

16Посмотри на меня и помилуй;

силы Твоей дай рабу Твоему;

спаси сына Твоей рабыни.

17Дай мне знак, что Ты ко мне благ;

пусть его увидят ненавидящие меня и устыдятся,

потому что Ты, Вечный, помог мне и утешил меня.

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 85:1-13

स्तोत्र 85

संगीत निर्देशक के लिये. कोराह के पुत्रों की रचना. एक स्तोत्र.

1याहवेह, आपने अपने देश पर कृपादृष्टि की है;

आपने याकोब की समृद्धि को पुनस्थापित किया है.

2आपने अपनी प्रजा के अपराध क्षमा कर दिए हैं

तथा उनके सभी पापों को ढांप दिया है.

3आपने अपना संपूर्ण कोप शांत कर दिया

तथा आप अपने घोर रोष से दूर हो गए हैं.

4परमेश्वर, हमारे उद्धारकर्ता, हमारी समृद्धि पुनस्थापित कर दीजिए,

हमारे विरुद्ध अपने कोप को मिटा दीजिए.

5क्या हमारे प्रति आपका क्रोध सदैव स्थायी रहेगा?

क्या आप अपने क्रोध को सभी पीढ़ियों तक बनाए रहेंगे?

6क्या आप हमें पुन: जिलाऐंगे नहीं,

कि आपकी प्रजा आप में प्रफुल्लित हो सके?

7याहवेह, हम पर अपना करुणा-प्रेम प्रदर्शित कीजिए,

और हमें अपना उद्धार प्रदान कीजिए.

8जो कुछ याहवेह परमेश्वर कहेंगे, वह मैं सुनूंगा;

उन्होंने अपनी प्रजा, अपने भक्तों के निमित्त शांति की प्रतिज्ञा की है.

किंतु उपयुक्त यह होगा कि वे पुन: मूर्खता न करें.

9इसमें कोई संदेह नहीं कि उनकी ओर से उद्धार उन्हीं के लिए निर्धारित है,

जो उनके श्रद्धालु हैं, कि हमारे देश में उनका तेज भर जाए.

10करुणा-प्रेम तथा सच्चाई संयुक्त हो गई हैं;

धार्मिकता तथा शांति ने एक दूसरे का चुंबन ले लिया.

11पृथ्वी से सच्चाई उगती रही है,

धार्मिकता स्वर्ग से यह देख रहे है.

12इसमें कोई संदेह नहीं कि याहवेह वही प्रदान करेंगे, जो उत्तम है,

और धरती अपनी उपज देगी.

13धार्मिकता आगे-आगे चलेगा

और वही हमारे कदम के लिए मार्ग तैयार करता है.