Забур 7 CARS - स्तोत्र 7 HCV

Священное Писание

Забур 7:1-18

Песнь 7

1Плачевная песнь7:1 Букв.: «шиггайон». Точное значение этого термина сегодня неизвестно. Возможно, он относится либо к сюжету песни, либо указывает на акцентированный ритм и патетическую манеру исполнения. Давуда, которую он воспел Вечному о Куше, что из рода Вениамина.

2Вечный, мой Бог, у Тебя я ищу прибежища.

Спаси меня и избавь от всех, кто меня преследует,

3иначе, как лев, меня разорвут,

растерзают – и не будет спасителя!

4Вечный, мой Бог, если я это сделал,

если руки мои творили несправедливость,

5если я сделал зло тому, кто со мною в мире,

или врага без повода обобрал,

6то пусть враг за мною погонится и настигнет,

пусть он жизнь мою втопчет в землю

и повергнет славу мою в прах. Пауза

7Вечный, восстань в гневе Своём,

ополчись на неистовство моих врагов!

Пробудись, заступись за меня на суде,

который Ты определил!

8Пусть окружат Тебя собравшиеся народы,

воссядь над ними на высоте7:8 Или: «над ними на высоту возвратись»..

9Судит Вечный народы.

Оправдай меня, Вечный, по праведности моей,

по моей непорочности, о Высочайший.

10Праведный Бог,

судящий помыслы и сердца,

положи конец беззаконию нечестивых,

но праведного укрепи.

11Щит мой – Бог Высочайший,

спасающий правых сердцем.

12Всевышний – судья справедливый,

Бог, строго взыскивающий каждый день.

13Если кто не раскается, Он наточит Свой меч,

согнёт лук и оснастит его тетивой,

14приготовит оружие смертоносное

и огненными сделает стрелы.

15Кто неправду зачал

и носит под сердцем зло,

тот разрешится от бремени ложью.

16Кто рыл и выкопал яму,

сам в неё упадёт.

17Зло его к нему же и вернётся,

на него же обратится его жестокость.

18Восславлю Вечного: праведен Он;

воспою хвалу имени Вечного, Высочайшего!

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 7:1-17

स्तोत्र 7

दावीद का शिग्गायोन7:0 शीर्षक: शायद साहित्यिक या संगीत संबंधित एक शब्द जिसे दावीद ने बिन्यामिन कुल के कूश के संदर्भ में याहवेह के सामने गाया.

1याहवेह, मेरे परमेश्वर! मैं आपके ही आश्रय में आया हूं;

उन सबसे मुझे बचा लीजिए, जो मेरा पीछा कर रहे हैं, उन सबसे मेरी रक्षा कीजिए,

2अन्यथा वे मेरे प्राण को सिंह की नाई फाड़कर टुकड़े-टुकड़े कर डाले

जबकि मुझे छुड़ाने के लिए वहां कोई भी न होगा.

3याहवेह, मेरे परमेश्वर, यदि मैंने वह किया है, जैसा वे कह रहे हैं,

यदि मैं किसी अनुचित कार्य का दोषी हूं,

4यदि मैंने उसकी बुराई की है, जिसके साथ मेरे शान्तिपूर्ण संबंध थे,

अथवा मैंने अपने शत्रु को अकारण ही मुक्त कर दिया है,

5तो शत्रु मेरा पीछा करे और मुझे पकड़ ले;

वह मुझे पैरों से कुचलकर मार डाले

और मेरी महिमा को धूल में मिला दे.

6याहवेह, कोप में उठिए;

मेरे शत्रुओं के विरुद्ध अत्यंत झुंझलाहट के साथ उठिये.

अपने निर्धारित न्याय-दंड के अनुरूप मेरे पक्ष में सहायता कीजिए.

7आपके चारों ओर विश्व के समस्त राष्ट्र एकत्र हों

और आप पुन: उनके मध्य अपने निर्धारित उच्चासन पर विराजमान हो जाइए,

8याहवेह ही राष्ट्रों के न्यायाध्यक्ष हैं.

याहवेह, मेरी सच्चाई,

एवं ईमानदारी के कारण मेरा न्याय करें,

9दुष्ट के दुष्कर्म समाप्त हो जाएं

आप ईमानदारी को स्थिर करें,

आप ही युक्त परमेश्वर हैं.

आप ही हैं, जो मन के विचारों एवं मर्म की विवेचना करते हैं.

10परमेश्वर मेरी सुरक्षा की ढाल हैं,

वही सीधे मनवालों को बचाता है.

11परमेश्वर युक्त न्यायाध्यक्ष हैं, ऐसे परमेश्वर,

जो सदैव ही बुराई से क्रोध करते हैं.

12यदि मनुष्य पश्चात्ताप न करे,

परमेश्वर अपनी तलवार की धार तीक्ष्ण करते हैं;

वह अपना धनुष साध बाण डोरी पर चढ़ा लेते हैं.

13परमेश्वर ने अपने घातक शस्त्र तैयार कर लिए हैं;

उन्होंने अपने बाणों को अग्निबाण बना लिया है.

14वह विनाश की योजनाओं को अपने गर्भ में धारण किए हुए है.

वह जन्म देता है तो झूठ उत्पन्न होता है.

15उसने भूमि खोदी और गड्ढा बनाया और

वह अपने ही खोदे हुए गड्ढे में जा गिरा.

16उसकी विनाशक युक्तियां लौटकर उसी के सिर पर आ पड़ेंगी;

उसकी हिंसा उसी की खोपड़ी पर आ उतरेगी.

17मैं याहवेह को उनके धर्म के अनुसार धन्यवाद दूंगा;

मैं सर्वोच्च याहवेह के नाम का स्तवन करूंगा.