Забур 57 CARS - स्तोत्र 57 HCV

Священное Писание

Забур 57:1-12

Песнь 57

1Дирижёру хора. На мотив «Не погуби». Мольба Давуда.

2Правдивы ли речи ваши, правители?

Справедливо ли судите людей?

3Нет, неправду вы замышляете,

обдумываете, какое зло сотворить на земле.

4От утробы матери нечестивые – среди отступников;

с рождения сбились с пути и обманывают.

5Яд их подобен яду змеиному,

яду глухой кобры, что уши свои затыкает

6и не слышит голоса заклинателя,

как бы тот ни был искусен.

7Всевышний, раздроби зубы у них во рту;

вырви, Вечный, клыки у львов!

8Да исчезнут, как высохшая вода;

пусть будут как надломленные стрелы в натянутом луке,

9как улитка, что растает, слизью изойдя,

как мертворождённый, что не увидит света.

10Прежде чем ваши котлы согреет горящий тёрн –

зелен он или сух, – нечестивые будут погублены.

11Праведники возрадуются, когда увидят возмездие,

когда омоют стопы в крови нечестивых.

12И будут тогда говорить:

«Поистине, праведным есть награда;

поистине, есть Бог, судящий на земле!»

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 57:1-11

स्तोत्र 57

संगीत निर्देशक के लिये. “अलतशख़ेथ” धुन पर आधारित. दावीद की मिकताम57:0 शीर्षक: शायद साहित्यिक या संगीत संबंधित एक शब्द गीत रचना. यह उस घटना का संदर्भ है, जब दावीद शाऊल की उपस्थिति से भागकर कन्दरा में जा छिपे थे.

1परमेश्वर, मुझ पर कृपा कीजिए, कृपा कीजिए,

क्योंकि मैंने आपको ही अपना आश्रय-स्थल बनाया है.

मैं आपके पंखों के नीचे आश्रय लिए रहूंगा,

जब तक विनाश मुझ पर से टल न जाए.

2मैं सर्वोच्च परमेश्वर को पुकारता हूं,

वही परमेश्वर, जो मेरे हित में अपना उद्देश्य पूर्ण करते हैं.

3वह स्वर्ग से सहायता भेजकर मेरा उद्धार करेंगे;

जो मुझे कुचलते हैं उनसे उन्हें घृणा है.

परमेश्वर अपना करुणा-प्रेम तथा अपना सत्य प्रेषित करेंगे.

4मैं सिंहों से घिर गया हूं;

मैं हिंसक पशुओं समान मनुष्यों के मध्य पड़ा हुआ हूं.

उनके दांत भालों और बाणों समान,

तथा जीभ तलवार समान तीक्ष्ण है.

5परमेश्वर, आप सर्वोच्च स्वर्ग में बसे हों;

आपका तेज समस्त पृथ्वी को भयभीत करता है.

6उन्होंने मेरे मार्ग में जाल बिछाया है;

मेरे प्राण डूबे जा रहे थे.

उन्होंने मेरे मार्ग में गड्ढा भी खोद रखा था,

किंतु वे स्वयं उसी में जा गिरे हैं.

7मेरा हृदय निश्चिंत है, परमेश्वर,

मेरा हृदय निश्चिंत है;

मैं संगीत गाऊंगा स्तुति करते हुए गाऊंगा.

8मेरी आत्मा, जागो!

नेबेल और किन्नोर जागो!

मैं सुबह को जागृत करूंगा.

9प्रभु, मैं लोगों के मध्य आपका आभार व्यक्त करूंगा;

राष्ट्रों के मघ्य मैं आपका स्तवन करूंगा.

10क्योंकि आपकी करुणा-प्रेम आकाश से भी महान है;

आपकी सच्चाई अन्तरिक्ष तक जा पहुंचती है.

11परमेश्वर, आप सर्वोच्च स्वर्ग में बसे हों;

आपका तेज समस्त पृथ्वी को भयभीत कर ले.