Забур 56 CARS - स्तोत्र 56 HCV

Священное Писание

Забур 56:1-12

Песнь 56

(Заб. 107:2-6)

1Дирижёру хора. На мотив «Не погуби»56:1 Не погуби – вероятно, зачин, начальные слова текста или названия песни (возможно, на основании Ис. 65:8). Возможно, такое замечание запрещало удалять заголовок или сам текст песни. То же в песнях 57, 58 и 74.. Мольба Давуда, когда он убежал от Шаула в пещеру56:1 См. 1 Цар. 22:1-2; 24:1-23..

2Всевышний, помилуй меня, помилуй!

У Тебя я ищу прибежища.

Я укроюсь в тени Твоих крыльев,

пока не пройдёт беда.

3Я взываю к Богу Высочайшему,

к Всевышнему, вершащему замысел Свой обо мне.

4Он пошлёт помощь с небес и спасёт меня,

посрамит гонителя моего; Пауза

пошлёт Всевышний милость Свою и верность.

5Львы меня окружили,

я лежу среди хищных зверей –

средь людей, чьи зубы – копья и стрелы,

чьи языки – наточенные мечи.

6Выше небес будь превознесён, о Всевышний;

над всей землёй да будет слава Твоя!

7Для ног моих они сеть раскинули;

сникла от горя моя душа.

На пути моём они вырыли яму,

но сами в неё упали. Пауза

8Сердце моё твёрдо, Всевышний, сердце моё твёрдо.

Буду петь и славить Тебя.

9Пробудись, моя душа!

Пробудитесь, лира и арфа!

Я проснусь на заре.

10Восхвалю Тебя, Владыка, среди народов,

воспою Тебя среди племён,

11потому что милость Твоя велика, до самых небес,

и верность Твоя достигает облаков.

12Выше небес будь превознесён, о Всевышний;

над всей землёй да будет слава Твоя!

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 56:1-13

स्तोत्र 56

संगीत निर्देशक के लिये. “दूर के बांज वृक्ष पर बैठा कबूतरी” धुन पर आधारित. दावीद की मिकताम56:0 शीर्षक: शायद साहित्यिक या संगीत संबंधित एक शब्द गीत रचना. यह उस घटना का संदर्भ है, जब गाथ देश में फिलिस्तीनियों ने दावीद को पकड़ लिया था.

1परमेश्वर, मुझ पर कृपा कीजिए,

क्योंकि शत्रु मुझे कुचल रहे हैं;

दिन भर उनका आक्रमण मुझ पर प्रबल होता जा रहा है.

2मेरे निंदक सारे दिन मेरा पीछा करते हैं;

अनेक हैं, जो मुझ पर अपने अहंकार से प्रहार कर रहे हैं.

3भयभीत होने की स्थिति में, मैं आप पर ही भरोसा करूंगा.

4परमेश्वर, आपकी प्रतिज्ञा स्तुति प्रशंसनीय है,

परमेश्वर, मैं आप पर ही भरोसा रखूंगा और पूर्णतः निर्भय हो जाऊंगा.

नश्वर मनुष्य मेरा क्या बिगाड़ लेगा?

5दिन भर मेरे वचन को उलटा कर प्रसारित किया जाता हैं;

मेरी हानि की युक्तियां सोचना उनकी दिनचर्या हो गई है.

6वे बुरी युक्ति रचते हैं, वे घात लगाए बैठे रहते हैं,

वे मेरे हर कदम पर दृष्टि बनाए रखते हैं,

कि कब मेरे प्राण ले सकें.

7उनकी दुष्टता को देखकर उन्हें बचकर न जाने दें;

परमेश्वर, अपने क्रोध के द्वारा इन लोगों को मिटा दीजिए.

8आपने मेरी भटकाने का विवरण रखा है;

आपने मेरे आंसू अपनी कुप्पी में जमा कर रखें हैं.

आपने इनका लेखा भी अपनी पुस्तक में रखा है?

9तब जैसे ही मैं आपको पुकारूंगा,

मेरे शत्रु पीठ दिखाकर भाग खड़े होंगे.

तब यह प्रमाणित हो जाएगा कि परमेश्वर मेरे पक्ष में हैं.

10वही परमेश्वर, जिनकी प्रतिज्ञा स्तुति प्रशंसनीय है,

वही याहवेह, जिनकी प्रतिज्ञा स्तुति प्रशंसनीय है.

11मैं परमेश्वर पर ही भरोसा रखूंगा, तब मुझे किसी का भय न होगा.

मनुष्य मेरा क्या बिगाड़ सकता है?

12परमेश्वर, मुझे आपके प्रति की गई मन्नतें पूर्ण करनी हैं;

मैं आपको अपनी आभार-बलि अर्पित करूंगा.

13क्योंकि आपने मृत्यु से मेरे प्राणों की रक्षा की है,

मेरे पांवों को आपने फिसलने से बचाया है कि

मैं, परमेश्वर, आपके साथ-साथ

जीवन ज्योति में चल सकूं.