Забур 52 CARS - स्तोत्र 52 HCV

Священное Писание

Забур 52:1-7

Песнь 52

(Заб. 13)

1Дирижёру хора. Под махалат52:1 Махалат – неизвестный термин, обозначающий музыкальный инструмент (возможно, свирель) или мотив.. Наставление Давуда.

2Говорят безумцы в сердце своём:

«Нет Всевышнего».

Они развратились, гнусны их дела;

нет делающего добро.

3Всевышний взирает с небес на людей,

чтобы увидеть, есть ли понимающий,

ищущий Всевышнего.

4Все отвернулись от Всевышнего,

все, как один, развратились;

нет делающего добро,

нет ни одного.

5Неужели не вразумятся делающие зло –

те, кто поедает мой народ, как хлеб,

и Всевышнего не призывает?

6Их охватит страх там,

где нечего бояться.

Всевышний разметает кости ополчающихся на тебя;

ты посрамишь их,

потому что Всевышний отверг их.

7Да придёт с Сиона спасение Исраилу!

Когда Всевышний восстановит Свой народ,

пусть ликуют потомки Якуба и радуется Исраил!

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 52:1-9

स्तोत्र 52

संगीत निर्देशक के लिये. दावीद की मसकील52:0 शीर्षक: शायद साहित्यिक या संगीत संबंधित एक शब्द गीत रचना. यह उस स्थिति का संदर्भ है, जब एदोमीवासी दोएग ने जाकर शाऊल को सूचित किया कि दावीद अहीमेलेख के आवास में ठहरे हैं.

1बलवान घमंड, मत करो अपने बुराई का अहंकार!

परमेश्वर की करुणा-प्रेम दिन भर प्रगट होती है.

2तेज उस्तरे जैसी

तुम्हारी जीभ विनाश की बुरी युक्ति रचती रहती है,

और तुम छल के कार्य में लिप्त रहते हो.

3तुम्हें भलाई की अपेक्षा अधर्म,

और सत्य की अपेक्षा झूठाचार पसंद है.

4हे छली जीभ,

तुझे तो हर एक बुराई शब्द प्रिय है!

5यह सुनिश्चित है कि परमेश्वर ने तेरे लिए स्थायी विनाश निर्धारित किया है:

वह तुझे उखाड़कर तेरे निवास से दूर कर देंगे;

परमेश्वर तुझे जीव-लोक से उखाड़ देंगे.

6यह देख धर्मी भयभीत हो जाएंगे;

वे उसे देख यह कहते हुए उपहास करेंगे,

7“उस पुरुष को देखो,

जिसने परमेश्वर को अपना आश्रय बनाना उपयुक्त न समझा

परंतु उसने अपनी धन-संपत्ति पर भरोसा किया

और अन्यों पर दुष्कर्म करते हुए सशक्त होता गया!”

8किंतु मैं परमेश्वर के निवास के

हरे-भरे जैतून वृक्ष के समान हूं;

मुझे परमेश्वर के करुणा-प्रेम पर

सदा-सर्वदा भरोसा रखता हूं.

9परमेश्वर, मैं आपके द्वारा किए गए कार्यों के लिए सदा-सर्वदा आपका धन्यवाद करता रहूंगा.

आपकी महिमा मेरा आश्वासन रहेगी,

क्योंकि यह पवित्र है,

आपके भक्तों के उपस्थिति में मैं आपकी वंदना करता रहूंगा.