Забур 31 CARS - स्तोत्र 31 HCV

Священное Писание

Забур 31:1-11

Песнь 31

НаставлениеПеснь 31 Букв.: «маскил». Точное значение этого термина сегодня неизвестно. Возможно, он означает искусно сложенную песнь или убедительный довод, призывающий народ славить Всевышнего. Также в песнях 41, 43, 44, 51–54, 73, 77, 87, 88 и 141. Давуда.

1Благословен тот,

чьи беззакония прощены

и чьи грехи покрыты!

2Благословен тот,

кому Вечный не вменит греха,

в чьём духе нет коварства!

3Пока я хранил молчание,

тело моё изнемогло

от стонов моих ежедневных.

4День и ночь напролёт

тяготела надо мною Твоя рука;

сила моя иссякла,

как от летнего зноя. Пауза

5Тогда я открыл Тебе свой грех

и не скрыл своего беззакония.

Я сказал: «Признаюсь перед Вечным в своих преступлениях»,

и Ты простил мой грех. Пауза

6Так пусть помолится тот, кто верен Тебе,

пока ещё может Тебя найти,

и когда разольются могучие воды,

они не достигнут его.

7Ты мне убежище;

Ты спасёшь меня от беды

и окружишь криками радости об избавлении. Пауза

8Вечный говорит:

«Я наставлю тебя и покажу тебе путь,

по которому тебе идти.

Я буду вести тебя

и не выпущу тебя из виду.

9Не будь как глупый мул или конь,

чей норов нужно обуздывать уздечкой и удилами,

чтобы они покорились».

10Много горя у нечестивых,

но надеющихся на Вечного

окружает Его любовь.

11Веселитесь о Вечном и ликуйте, праведные!

Пойте, все правые сердцем!

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 31:1-24

स्तोत्र 31

संगीत निर्देशक के लिये. दावीद का एक स्तोत्र.

1याहवेह, मैंने आप में ही शरण ली है;

मुझे कभी लज्जित न होने देना;

अपनी धार्मिकता के कारण हे परमेश्वर, मेरा बचाव कीजिए.

2मेरी पुकार सुनकर,

तुरंत मुझे छुड़ा लीजिए;

मेरी आश्रय-चट्टान होकर मेरे उद्धार का,

दृढ़ रच बनकर मेरी रक्षा कीजिए.

3इसलिये कि आप मेरी चट्टान और मेरा रच हैं,

अपनी ही महिमा के निमित्त मेरे मार्ग में अगुवाई एवं संचालन कीजिए.

4मुझे उस जाल से बचा लीजिए जो मेरे लिए बिछाया गया है,

क्योंकि आप ही मेरा आश्रय-स्थल हैं.

5अपनी आत्मा मैं आपके हाथों में सौंप रहा हूं;

याहवेह, सत्य के परमेश्वर, आपने ही मुझे मुक्त किया है.

6मुझे घृणा है व्यर्थ प्रतिमाओं के उपासकों से;

किंतु मेरी, आस्था है याहवेह में.

7मैं हर्षित होकर आपके करुणा-प्रेम में उल्‍लासित होऊंगा,

आपने मेरी पीड़ा पर ध्यान दिया

और मेरे प्राण की वेदना को पहचाना है.

8आपने मुझे शत्रु के हाथों में नहीं सौंपा

और मुझे स्वतंत्र चलते फिरते की स्थिति प्रदान की.

9याहवेह, मुझ पर अनुग्रह कीजिए, मैं इस समय संकट में हूं;

शोक से मेरी आंखें धुंधली पड़ चुकी हैं,

मेरे प्राण तथा मेरी देह भी शिथिल हो चुकी है.

10वेदना में मेरा जीवन समाप्त हुआ जा रहा है

आहें भरते-भरते मेरी आयु नष्ट हो रही है;

अपराधों ने मेरी शक्ति को खत्म कर दिया है,

मेरी हड्डियां तक जीर्ण हो चुकी हैं.

11विरोधियों के कारण,

मैं अपने पड़ोसियों के सामने घृणास्पद बन गया हूं,

मैं अपने परिचितों के सामने भयास्पद बन गया हूं,

सड़क पर मुझे देख वे छिपने लगते हैं.

12उन्होंने मुझे ऐसे भुला दिया है मानो मैं एक मृत पुरुष हूं;

मैं वैसा ही व्यर्थ हो गया हूं जैसे एक टूटा पात्र.

13मैं सुन रहा हूं कि अनेक-अनेक निरंतर मेरी निंदा कर रहे हैं.

“आतंक ने मुझे चारों ओर से घेर लिया है!”

वे मेरे विरुद्ध सम्मति रच रहे हैं,

वे मेरे प्राण लेने के लिए तैयार हो गए हैं.

14किंतु याहवेह, मैंने आप पर भरोसा रखा है;

यह मेरी साक्षी है, “आप ही मेरे परमेश्वर हैं.”

15मेरा जीवन आपके ही हाथों में है;

मुझे मेरे शत्रुओं से छुड़ा लीजिए,

उन सबसे मेरी रक्षा कीजिए, जो मेरा पीछा कर रहे हैं.

16अपने मुखमंडल का प्रकाश अपने सेवक पर चमकाईए;

अपने करुणा-प्रेम के कारण मेरा उद्धार कीजिए.

17याहवेह, मुझे लज्जित न होना पड़े,

मैं बार-बार आपको पुकारता रहा हूं;

लज्जित हों दुष्ट और अधोलोक हो उनकी नियति,

जहां जाकर वे चुपचाप हो जाएं.

18उनके झूठ भाषी ओंठ मूक हो जाएं,

क्योंकि वे घृणा एवं अहंकार से प्रेरित हो,

धर्मियों के विरुद्ध अहंकार करते रहते हैं.

19कैसी महान है आपकी भलाई,

जो आपने अपने श्रद्धालुओं के निमित्त आरक्षित रखी है,

जो आपने अपने शरणागतों के लिए सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की है.

20अपनी उपस्थिति के आश्रय-स्थल में आप उन्हें

मनुष्यों के षडयंत्रों से सुरक्षा प्रदान करते हैं;

अपने आवास में आप उन्हें शत्रुओं के झगड़ालू जीभ से

सुरक्षा प्रदान करते हैं.

21स्तुत्य हैं, याहवेह!

जब शत्रुओं ने मुझे घेर लिया था,

उन्होंने मुझ पर अपना करुणा-प्रेम प्रदर्शित किया.

22घबराहट में मैं कह उठा था,

“मैं आपकी दृष्टि से दूर हो चुका हूं!”

किंतु जब मैंने सहायता के लिए आपको आवाज दिया

आपने मेरी पुकार सुन ली.

23याहवेह के सभी भक्तों, उनसे प्रेम करो!

सच्चे लोगों को याहवेह सुरक्षा प्रदान करते हैं,

किंतु अहंकारी को पूरा-पूरा दंड.

24तुम सभी, जिन्होंने याहवेह पर भरोसा रखा है,

दृढ़ रहते हुए साहसी बनो.