Забур 16 CARS - स्तोत्र 16 HCV

Священное Писание

Забур 16:1-15

Песнь 16

Молитва Давуда.

1Услышь, Вечный, мольбу мою о справедливости;

прислушайся к крику моему!

Внемли молитве из нелживых уст!

2Суди меня Сам,

пусть увидят правду глаза Твои.

3Ты изучил моё сердце, испытал меня ночью;

Ты испытал меня, но не нашёл вины,

потому что я не грешу устами моими.

4Что же до дел других,

то по слову из Твоих уст

я себя сохранил

от путей притеснителя.

5Стопы мои шли по Твоим путям,

ноги мои не оступались.

6Я взываю к Тебе, Всевышний, ведь Ты мне ответишь;

прислушайся ко мне, молитву мою услышь.

7Яви мне чудо милости Твоей,

Ты, правой рукой Своей спасающий

тех, кто ищет у Тебя прибежища от врага.

8Береги меня, как зеницу ока;

в тени Своих крыльев сохрани меня

9от нечестивых, ополчившихся на меня,

от смертельных врагов, обступивших меня.

10Закрыты для жалости их сердца,

и уста их надменное говорят.

11Они выслеживали меня, а теперь окружают;

высматривают глаза их удобный миг,

чтобы на землю меня повергнуть.

12Они словно лев голодный,

словно лев, что в засаде ждёт.

13Вечный, восстань, предстань пред ними, повергни их!

Своим мечом избавь меня от нечестивых;

14Своею рукою, Вечный, спаси от людей –

людей этого мира, чья доля лишь в этой жизни.

Пусть наполнится чрево их тем, что Ты для них припас,

пусть у детей их излишек останется,

пусть внукам своим отдадут оставшееся.

15А я в праведности увижу Твоё лицо,

пробудившись, буду насыщаться образом Твоим.

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 16:1-11

स्तोत्र 16

दावीद की मिकताम16:0 शीर्षक: शायद साहित्यिक या संगीत संबंधित एक शब्द गीत रचना.

1परमेश्वर, मुझे सुरक्षा प्रदान कीजिए,

क्योंकि मैंने आप में आश्रय लिया है.

2याहवेह से मैंने कहा, “आप ही प्रभु हैं;

वस्तुतः आपको छोड़ मेरा हित संभव ही नहीं.”

3पृथ्वी पर आपके लोग पवित्र महिमामय हैं,

“वे ही मेरे सुख एवं आनंद का स्रोत हैं.”

4वे, जो अन्य देवताओं के पीछे भागते हैं, उनके क्लेशों में वृद्धि होती जाएगी.

मैं उन देवताओं के लिए न तो रक्त की पेय बलि उंडेलूंगा

और न मैं उनका नाम अपने ओंठों पर लाऊंगा.

5याहवेह, आप मेरा हिस्सा हैं, आप ही मेरा भाग हैं;

आप ही मुझे सुरक्षा प्रदान करते हैं.

6माप की डोर ने मेरे लिए रमणीय स्थान निर्धारित किए हैं;

निस्संदेह मेरा भाग आकर्षक है.

7मैं याहवेह को स्तुत्य कहूंगा, जिन्होंने मेरा मार्गदर्शन किया है;

रात्रि में भी मेरा अन्तःकरण मुझे शिक्षा देता है.

8मैंने सदैव ही याहवेह की उपस्थिति का बोध अपने सामने बनाए रखा है.

जब वह नित मेरे दायें पक्ष में रहते हैं, तो भला मैं कैसे लड़खड़ा सकता हूं.

9इसलिये मेरा हृदय आनंदित और मेरी जीभ मगन हुई;

मेरा शरीर भी सुरक्षा में विश्राम करेगा,

10क्योंकि आप मेरे प्राण को अधोलोक में सड़ने नहीं छोड़ देंगे,

और न अपने मनचाहे प्रिय पात्र को मृत्यु के क्षय में.

11आप मुझ पर सर्वदा जीवन का मार्ग प्रकाशित करेंगे;

आपकी उपस्थिति में परम आनंद है,

आपके दाहिने हाथ में सर्वदा सुख बना रहता है.