Забур 148 CARS - स्तोत्र 148 HCV

Священное Писание

Забур 148:1-14

Песнь 148

1Славьте Вечного!

Славьте Вечного с небес,

в высотах прославляйте Его.

2Славьте Его, все Его ангелы,

славьте Его, все Его небесные воинства.

3Славьте Его, солнце и луна,

славьте Его, все блистающие звёзды.

4Славьте Его, небеса небес

и воды, которые выше небес148:4 См. Нач. 1:7..

5Пусть славят имя Вечного,

потому что Он повелел – и они были созданы.

6Он утвердил их навечно,

дал установление нерушимое.

7Славьте Вечного с земли,

морские чудовища и все водные глубины,

8молния и град, снег и туман,

бурный ветер, исполняющий Его слово,

9горы и все холмы,

плодовые деревья и все кедры,

10звери и всякий скот,

пресмыкающиеся и крылатые птицы,

11земные цари и все народы,

вожди и все земные правители,

12юноши и девушки,

старцы и дети –

13славьте все имя Вечного,

потому что только Его имя превознесено!

Слава Его выше земли и небес.

14Он сделал сильным148:14 Букв.: «возвысил рог». Рог был символом могущества, власти и силы. Свой народ,

прославил верных Ему –

народ Исраила, который близок Ему.

Славьте Вечного!

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 148:1-14

स्तोत्र 148

1याहवेह का स्तवन हो.

आकाशमंडल में याहवेह का स्तवन हो;

उच्च स्थानों में उनका स्तवन हो.

2उनके समस्त स्वर्गदूत उनका स्तवन करें;

स्वर्गिक सेनाएं उनका स्तवन करें.

3सूर्य और चंद्रमा उनका स्तवन करें;

टिमटिमाते समस्त तारे उनका स्तवन करें.

4सर्वोच्च स्वर्ग उनका स्तवन करे और वह जल भी,

जो स्वर्ग के ऊपर संचित है.

5ये सभी याहवेह की महिमा का स्तवन करें,

क्योंकि इन सबकी रचना, आदेश मात्र से हुई है,

6उन्होंने इन्हें सदा-सर्वदा के लिए स्थापित किया है;

उन्होंने राजाज्ञा प्रसारित की, जिसको टाला नहीं जा सकता.

7पृथ्वी से याहवेह का स्तवन किया जाए,

महासागर तथा उनके समस्त विशालकाय प्राणी,

8अग्नि और ओले, हिम और धुंध,

प्रचंड बवंडर उनका आदेश पालन करते हैं,

9पर्वत और पहाड़ियां,

फलदायी वृक्ष तथा सभी देवदार,

10वन्य पशु और पालतू पशु,

रेंगते जंतु और उड़ते पक्षी,

11पृथ्वी के राजा और राज्य के लोग,

प्रधान और पृथ्वी के समस्त शासक,

12युवक और युवतियां,

वृद्ध और बालक.

13सभी याहवेह की महिमा का गुणगान करें,

क्योंकि मात्र उन्हीं की महिमा सर्वोच्च है;

उनका ही तेज पृथ्वी और स्वर्ग से महान है.

14अपनी प्रजा के लिए उन्होंने एक सामर्थ्यी राजा का उद्भव किया है,

जो उनके सभी भक्तों के गुणगान का पात्र हैं,

इस्राएली प्रजा के लिए, जो उनकी अत्यंत प्रिय है.

याहवेह की स्तुति हो.