Забур 140 CARS - स्तोत्र 140 HCV

Священное Писание

Забур 140:1-10

Песнь 140

Песнь Давуда.

1Вечный, я взываю к Тебе: поспеши ко мне!

Услышь моё моление, когда я взываю к Тебе.

2Прими молитву мою,

как возжигание благовоний перед Тобой,

и возношение моих рук –

как вечернее жертвоприношение.

3Поставь, Вечный, стражу у моего рта,

стереги двери моих уст.

4Не дай моему сердцу склониться к злу,

не дай участвовать в беззаконии нечестивых,

и не дай вкусить от их сластей.

5Пусть накажет меня праведник – это милость;

пусть обличает меня – это лучшее помазание,

которое не отринет моя голова.

Но моя молитва против злодеев:

6да будут вожди их сброшены с утёсов.

Тогда люди узнают,

что мои слова были правдивы.

7Как земля, которую рассекают и дробят,

так рассыпаны наши кости у пасти мира мёртвых.

8Но глаза мои устремлены на Тебя, Владыка Вечный;

на Тебя надеюсь, не дай мне умереть!

9Сохрани меня от сетей, которые раскинули для меня,

и от западни злодеев.

10Пусть нечестивые падут в свои же сети,

а я их избегу.

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 140:1-13

स्तोत्र 140

संगीत निर्देशक के लिये. दावीद का एक स्तोत्र.

1याहवेह, दुष्ट पुरुषों से मुझे उद्धार प्रदान कीजिए;

हिंसक पुरुषों से मेरी रक्षा कीजिए,

2वे मन ही मन अनर्थ युक्तियां रचते रहते हैं

और सदैव युद्ध ही भड़काते रहते हैं.

3उन्होंने अपनी जीभ सर्प सी तीखी बना रखी है;

उनके ओंठों के नीचे नाग का विष भरा है.

4याहवेह, दुष्टों से मेरी रक्षा कीजिए;

मुझे उन हिंसक पुरुषों से सुरक्षा प्रदान कीजिए,

जिन्होंने, मेरे पैरों को उखाड़ने के लिए युक्ति कि है.

5उन अहंकारियों ने मेरे पैरों के लिए एक फंदा बनाकर छिपा दिया है;

तथा रस्सियों का एक जाल भी बिछा दिया है

मार्ग के किनारे उन्होंने मेरे ही लिए फंदे लगा रखे हैं.

6मैं याहवेह से कहता हूं, “आप ही मेरे परमेश्वर हैं.”

याहवेह, कृपा करके मेरी पुकार पर ध्यान दीजिए.

7याहवेह, मेरे प्रभु, आप ही मेरे उद्धार का बल हैं,

युद्ध के समय आप ही मेरे सिर का आवरण बने.

8दुष्टों की अभिलाषा पूर्ण न होने दें, याहवेह;

उनकी बुरी युक्ति आगे बढ़ने न पाए अन्यथा वे गर्व में ऊंचा हो जाएंगे.

9जिन्होंने इस समय मुझे घेरा हुआ है;

उनके ओंठों द्वारा उत्पन्न कार्य उन्हीं के सिर पर आ पड़े.

10उनके ऊपर जलते हुए कोयलों की वृष्टि हो;

वे आग में फेंक दिए जाएं,

वे दलदल के गड्ढे में डाल दिए जाएं, कि वे उससे बाहर ही न निकल सकें.

11निंदक इस भूमि पर अपने पैर ही न जमा सकें;

हिंसक पुरुष अति शीघ्र बुराई द्वारा पकड़े जाएं.

12मैं जानता हूं कि याहवेह दुखित का पक्ष अवश्य लेंगे

तथा दीन को न्याय भी दिलाएंगे.

13निश्चयतः धर्मी आपके नाम का आभार मानेंगे,

सीधे आपकी उपस्थिति में निवास करेंगे.