Забур 136 CARS - स्तोत्र 136 HCV

Священное Писание

Забур 136:1-9

Песнь 136

1У рек Вавилона мы сидели и плакали,

когда вспоминали Сион.

2Там на вербах

мы повесили наши арфы.

3Там пленившие нас требовали от нас песен,

притеснители наши требовали от нас веселья,

говоря: «Спойте нам одну из песен Сиона».

4Как нам петь песнь Вечного

в чужой земле?

5Если я забуду тебя, Иерусалим,

то пусть отнимется моя правая рука.

6Пусть прилипнет язык мой к нёбу,

если не буду помнить тебя,

если не будет Иерусалим

моей самой большой радостью.

7Не забывай, Вечный, что делали эдомитяне

в день захвата вавилонянами Иерусалима,

как они говорили: «Разрушайте,

разрушайте его до основания!»

8Дочь Вавилона136:8 Дочь Вавилона – олицетворение Вавилона., обречённая на разорение!

Благословен тот, кто воздаст тебе

за то, что ты сделала с нами.

9Благословен тот, кто возьмёт и разобьёт

твоих младенцев о камень.

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 136:1-26

स्तोत्र 136

1याहवेह का धन्यवाद करो,

क्योंकि वे भले हैं, सनातन है उनकी करुणा.

2परम परमेश्वर के प्रति आभार अभिव्यक्त करो.

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

3उनके प्रति, जो प्रधानों के प्रधान हैं, आभार अभिव्यक्त करो:

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

4उनके प्रति, जिनके अतिरिक्त अन्य कोई अद्भुत कार्य कर ही नहीं सकता,

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

5जिन्होंने अपनी सुबुद्धि से स्वर्ग का निर्माण किया,

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

6जिन्होंने जल के ऊपर पृथ्वी का विस्तार कर दिया,

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

7जिन्होंने प्रखर प्रकाश पुंजों की रचना की,

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

8दिन के प्रभुत्व के लिए सूर्य का,

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

9रात्रि के लिए चंद्रमा और तारों का;

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

10उन्हीं के प्रति, जिन्होंने मिस्र देश के पहलौंठों की हत्या की,

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

11और उनके मध्य से इस्राएल राष्ट्र को बाहर निकाल लिया,

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

12सशक्त भुजा और ऊंची उठी हुई बांह के द्वारा;

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

13उन्हीं के प्रति, जिन्होंने लाल सागर को विभक्त कर दिया था

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

14और उसके मध्य की भूमि से इस्राएलियों को पार करवा दिया,

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

15किंतु फ़रोह और उसकी सेना को सागर ही में डुबो दिया;

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

16उन्हीं के प्रति, जिन्होंने अपनी प्रजा को वन से पार कराया;

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

17जिन्होंने प्रख्यात राजाओं की हत्या की,

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

18जिन्होंने सशक्त राजाओं का वध कर दिया,

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

19अमोरियों के राजा सीहोन का,

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

20बाशान के राजा ओग का,

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

21तथा उनकी भूमि निज भाग में दे दी,

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

22अपने सेवक इस्राएल को, निज भाग में दे दी,

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

23उन्हीं के प्रति, जिन्होंने हमारी दुर्दशा में हमारी सुधि ली

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

24और हमें हमारे शत्रुओं से मुक्त किया.

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

25जो सब प्राणियों के आहार का प्रबंध करते हैं.

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.

26स्वर्गिक परमेश्वर के प्रति आभार अभिव्यक्त करो.

क्योंकि सनातन है उनकी करुणा.