Забур 127 CARS - स्तोत्र 127 HCV

Священное Писание

Забур 127:1-6

Песнь 127

Песнь восхождения.

1Благословен всякий, кто боится Вечного

и ходит Его путями!

2Ты будешь есть плоды своего труда;

благословение и процветание будут у тебя.

3Жена твоя будет как плодовитая лоза

в твоём доме,

твои дети будут как ветви маслин

вокруг твоего стола.

4Так будет благословлён человек,

боящийся Вечного.

5Да благословит тебя Вечный с Сиона,

да увидишь ты процветание Иерусалима

во все дни своей жизни

6и да увидишь своих внуков.

Мир Исраилу!

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 127:1-5

स्तोत्र 127

आराधना के लिए यात्रियों के गीत. शलोमोन की रचना.

1यदि गृह-निर्माण याहवेह द्वारा न किया गया हो तो,

श्रमिकों का परिश्रम निरर्थक होता है.

यदि नगर की सुरक्षा याहवेह न करें,

तो रखवाले द्वारा की गई चौकसी व्यर्थ होती है.

2तुम्हारा सुबह जाग उठना

देर तक जागे रहना,

संकटपूर्ण श्रम का भोजन करना व्यर्थ है;

क्योंकि याहवेह द्वारा नींद का अनुदान उनके लिए है, जिनसे वह प्रेम करते हैं.

3संतान याहवेह के दिए हुए निज भाग होते हैं,

तथा बालक उनका दिया हुआ उपहार.

4युवावस्था में उत्पन्न हुई संतान वैसी ही होती है

जैसे योद्धा के हाथों में बाण.

5कैसा धन्य होता है वह पुरुष

जिसका तरकश इन बाणों से भरा हुआ है.

नगर द्वार पर शत्रुओं का प्रतिकार करते हुए

उन्हें लज्जित नहीं होना पड़ेगा.