Забур 121 CARS - स्तोत्र 121 HCV

Священное Писание

Забур 121:1-9

Песнь 121

Песнь восхождения, Давуда.

1Обрадовался я, когда мне сказали:

«Пойдём в храм Вечного».

2Ноги наши стоят

у ворот твоих, Иерусалим.

3Иерусалим – плотно застроенный город.

4Туда поднимаются роды,

роды Вечного,

по Закону Исраила,

воздать хвалу имени Вечного.

5Там стоят престолы суда,

престолы дома Давуда.

6Молитесь о мире для Иерусалима:

«Пусть будут благополучны любящие тебя.

7Пусть будет мир в твоих стенах

и благополучие в твоих дворцах».

8Ради моей семьи и моих друзей

скажу: «Мир тебе!»

9Ради храма Вечного, нашего Бога,

желаю блага тебе.

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 121:1-8

स्तोत्र 121

आराधना के लिए यात्रियों के गीत.

1मैं अपने आंखें पर्वतों की ओर उठाता—

क्या मेरी सहायता का स्रोत वहां है?

2मेरी सहायता का स्रोत तो याहवेह हैं,

स्वर्ग और पृथ्वी के कर्ता.

3वह तुम्हारा पैर फिसलने न देगा;

वह, जो तुम्हें सुरक्षित रखते हैं, झपकी नहीं लेते.

4निश्चयतः इस्राएल के रक्षक न तो झपकी लेंगे

और न सो जाएंगे.

5याहवेह तुम्हें सुरक्षित रखते हैं—

तुम्हारे दायें पक्ष में उपस्थित याहवेह तुम्हारी सुरक्षा की छाया हैं;

6न तो दिन के समय सूर्य से तुम्हारी कोई हानि होगी,

और न रात्रि में चंद्रमा से.

7सभी प्रकार के बुराई से याहवेह तुम्हारी रक्षा करेंगे,

वह तुम्हारे जीवन की रक्षा करेंगे;

8तुम्हारे आने जाने में याहवेह तुम्हें सुरक्षित रखेंगे,

वर्तमान में और सदा-सर्वदा.