Забур 120 CARS - स्तोत्र 120 HCV

Священное Писание

Забур 120:1-8

Песнь 120

Песнь восхождения.

1Обращаю взгляд свой к горам,

откуда придёт мне помощь?

2Помощь мне придёт от Вечного,

сотворившего небо и землю.

3Он не позволит ноге твоей пошатнуться:

Хранящий тебя не задремлет;

4истинно, Хранящий Исраил

не задремлет и не уснёт.

5Вечный – страж твой;

Вечный – тень, что всегда рядом

и хранит тебя от палящего зноя.

6Не поразят тебя ни солнце днём,

ни луна – ночью120:6 Здесь говорится о том, что Всевышний будет оберегать от всех опасностей и днём, и ночью..

7Вечный сохранит тебя от всякого зла;

Он сохранит твою жизнь.

8Вечный будет хранить тебя,

где бы ты ни был и что бы ни делал,

отныне и вовеки.

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 120:1-7

स्तोत्र 120

आराधना के लिए यात्रियों के गीत.

1मैंने अपनी पीड़ा में याहवेह को पुकारा,

और उन्होंने मेरी सुन ली.

2याहवेह, झूठ बोलनेवाले ओंठों से मेरी रक्षा कीजिए,

छली जीभ से मुझे सुरक्षा प्रदान कीजिए.

3तुम्हारे साथ परमेश्वर क्या करेंगे,

और उसके भी अतिरिक्त और क्या करेंगे,

ओ छली जीभ?

4वह तुझे योद्धा के तीक्ष्ण बाणों से दंड देंगे,

वह तुझे वृक्ष की लकड़ी के प्रज्वलित कोयलों से दंड देंगे.

5धिक्कार है मुझ पर, जो मैं मेशेक देश में जा निवास करूं,

जो मैं केदार देश के मण्डपों में जा रहूं!

6बड़ी लंबी खींच गई है वह अवधि

जो मैंने उनके साथ रहते हुए व्यतीत की है, जिन्हें शांति प्रिय नहीं.

7मैं खड़ा शांति प्रिय पुरुष;

किंतु जब मैं कुछ कहता हूं, वे युद्ध पर उतारू हो जाते हैं.