Забур 12 CARS - स्तोत्र 12 HCV

Священное Писание

Забур 12:1-6

Песнь 12

1Дирижёру хора. Песнь Давуда.

2Как долго, Вечный? Неужели забыл Ты меня навеки?

Как долго Ты будешь скрывать от меня Своё лицо?

3Как долго будет переживание терзать мою душу

и боль – ежедневно сокрушать моё сердце?

Как долго врагу моему надо мной кичиться?

4Посмотри на меня и ответь, Вечный, мой Бог.

Глаза мои просветли,

чтобы мне не уснуть смертным сном,

5чтобы враг не сказал: «Я его превозмог»,

и когда я паду, не радовались бы недруги мои.

6Я уповаю на Твою милость,

моё сердце возрадуется спасению Твоему.

Вечному буду петь,

потому что Он благ ко мне.

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 12:1-8

स्तोत्र 12

संगीत निर्देशक के लिये. शेमिनिथ12:0 शीर्षक: शायद संगीत संबंधित एक शब्द पर आधारित. दावीद का एक स्तोत्र.

1याहवेह, हमारी रक्षा कीजिए, कोई भक्त अब शेष न रहा;

मनुष्यों के मध्य से विश्वासयोग्य पुरुष नहीं रहे.

2मनुष्य मनुष्य से झूठी बातें कर रहा है;

वे चापलूसी करते हुए

एक दूसरे का छल करते हैं.

3अच्छा होगा यदि याहवेह चापलूसी ओंठों

तथा घमंडी जीभ को काट डालें.

4वे डींग मारते हुए कहते हैं,

“शक्ति हमारी जीभ में मगन है;

ओंठ हमारे वश में हैं. कौन कर सकता है हमें अधीन?”

5किंतु अब याहवेह का कहना है, “दुःखितों के प्रति की गई हिंसा के कारण,

निर्धनों की करुण वाणी के कारण मैं उनके पक्ष में उठ खड़ा होऊंगा.

मैं उन्हें वही सुरक्षा प्रदान करूंगा, वे जिसकी कामना कर रहे हैं.”

6याहवेह की प्रतिज्ञाएं सर्वथा विश्वासयोग्य हैं,

उस चांदी-समान हैं,

जिसे भट्टी में सात बार तपा कर शुद्ध किया गया है.

7याहवेह, उन्हें अपनी सुरक्षा में बनाए रखेंगे

उन्हें इस पीढ़ी से सर्वदा सुरक्षा प्रदान करेंगे,

8जब मनुष्यों द्वारा नीचता का आदर किया जाता है,

तब दुष्ट चारों और अकड़ कर चलते फिरते हैं.