Забур 115 CARS - स्तोत्र 115 HCV

Священное Писание

Забур 115:1-10

Песнь 115Песнь 115 В тексте оригинала песни 114 и 115 объединены в одну песнь.

1Я верил, даже когда говорил115:1 Или: «поэтому я и говорил».:

«Я сильно сокрушён».

2В исступлении я сказал:

«Все люди – лжецы».

3Чем воздам я Вечному

за всю Его доброту ко мне?

4Возолью вино в жертву Вечному,

возблагодарю Его за спасение моё.

5Исполню мои обеты Вечному

перед всем Его народом.

6Дорога в глазах Вечного

смерть верных Ему.

7Вечный, истинно я – Твой раб;

Я – Твой раб и сын Твоей рабыни.

Ты освободил меня от цепей.

8Принесу Тебе жертву благодарности

и призову имя Вечного.

9Исполню мои обеты Вечному

перед всем Его народом,

10во дворах дома Вечного,

посреди тебя, Иерусалим!

Славьте Вечного!

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 115:1-18

स्तोत्र 115

1हमारा नहीं, याहवेह, हमारा नहीं

परंतु आपका ही तेज हो,

आपके करुणा-प्रेम और आपकी सच्चाई के निमित्त.

2अन्य राष्ट्र यह क्यों कह रहे हैं,

“कहां है उनका परमेश्वर?”

3स्वर्ग में हैं हमारे परमेश्वर और वह वही सब करते हैं;

जिसमें उनकी चाहत है.

4किंतु इन राष्ट्रों की प्रतिमाएं स्वर्ण एवं चांदी की हैं,

जिन्हें मनुष्यों के हाथों ने रचा है.

5हां, उनका मुख अवश्य रचा गया है, किंतु ये बोल नहीं सकती,

उनके आंखें अवश्य रचे गए हैं, किंतु ये देख नहीं सकती.

6उनके कान अवश्य रचे गए हैं, किंतु ये सुन नहीं सकती,

नाक रची गई है, किंतु ये सूंघ नहीं सकती.

7इनके हाथ रचे गए हैं, किंतु ये स्पर्श नहीं कर सकती,

पैर भी रचे गए हैं, किंतु ये चल फिर नहीं सकती,

न ही ये अपने कण्ठ से कोई स्वर ही उच्चार सकती हैं.

8इनके समान ही हो जाएंगे इनके निर्माता,

साथ ही वे सभी, जो इन पर भरोसा करते हैं.

9इस्राएल के वंशजों, याहवेह पर भरोसा करो;

वही हैं तुम्हारे सहायक तथा रक्षक.

10अहरोन के वंशजों, याहवेह पर भरोसा करो;

वही हैं तुम्हारे सहायक तथा रक्षक.

11याहवेह के भय माननेवालों, याहवेह में भरोसा रखे,

याहवेह सहारा देता है और अपने अनुयायियों की रक्षा करता है.

12याहवेह को हमारा स्मरण रहता है, हम पर उनकी कृपादृष्टि रहेगी:

याहवेह अपने लोग इस्राएल को आशीर्वाद देंगे,

उनकी कृपादृष्टि अहरोन के वंश पर रहेगी.

13उनकी कृपादृष्टि उन सभी पर रहेगी, जिनमें याहवेह के प्रति श्रद्धा-भय-भाव है—

चाहे वे साधारण हों अथवा विशिष्ट.

14याहवेह तुम्हें ऊंचा करें,

तुम्हें और तुम्हारी संतान को.

15याहवेह की कृपादृष्टि तुम पर स्थिर रहे,

जो स्वर्ग और पृथ्वी के रचनेवाले हैं.

16सर्वोच्च स्वर्ग के स्वामी याहवेह हैं,

किंतु पृथ्वी उन्होंने मनुष्य को सौंपी है.

17वे मृतक नहीं हैं, जो याहवेह का स्तवन करते हैं,

न ही जो चिर-निद्रा में समा जाते हैं;

18किंतु जहां तक हमारा प्रश्न है, हम याहवेह का गुणगान करते रहेंगे,

इस समय तथा सदा-सर्वदा.

याहवेह का स्तवन हो.