Забур 112 CARS - स्तोत्र 112 HCV

Священное Писание

Забур 112:1-9

Песнь 112

Славьте Вечного!

1Воздайте хвалу, о рабы Вечного,

воздайте хвалу имени Вечного!

2Да будет прославлено имя Вечного

отныне и вовеки.

3От востока и до запада

да будет прославлено имя Вечного.

4Вечный превознесён над всеми народами,

и слава Его выше небес.

5Кто подобен Вечному, нашему Богу,

восседающему на высоте

6и склоняющемуся, чтобы видеть,

что происходит на небе и на земле?

7Он поднимает бедного из праха

и возвышает нищего из грязи,

8чтобы посадить их с вождями,

с вождями их народа.

9Бесплодную женщину делает

счастливой матерью в её доме.

Славьте Вечного!

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 112:1-10

स्तोत्र 112

1याहवेह का स्तवन हो.

धन्य है वह पुरुष, जो याहवेह के प्रति श्रद्धा-भय-भाव रखता है,

जिसने उनके आदेशों के पालन में अधिक आनंद पाया है.

2उसके वंशजों का तेज समस्त पृथ्वी पर होगा;

सीधे पुरुष की हर एक पीढ़ी धन्य होगी.

3उसके परिवार में संपत्ति और समृद्धि का वास है,

सदा बनी रहती है उसकी सच्चाई और धार्मिकता

4सीधे लोगों के लिए अंधकार में भी प्रकाश का उदय होता है,

वह उदार, कृपालु और धर्मी है.

5उत्तम होगा उस पुरुष का प्रतिफल, जो उदार है, जो उदारतापूर्वक ऋण देता है,

जो अपने लेनदेन में सीधे है.

6यह सुनिश्चित है, कि वह कभी पथभ्रष्ट न होगा;

धर्मी अपने पीछे स्थायी नाम छोड़ जाता है.

7उसे किसी बुराई के समाचार से भय नहीं होता;

याहवेह पर भरोसा करते हुए उसका हृदय शांत और स्थिर बना रहता है.

8उसका हृदय सुरक्षा में स्थापित है, तब उसे कोई भय नहीं होता;

अन्ततः वही शत्रुओं पर जयन्त होकर दृष्टि करेगा.

9उसने दरिद्रों को उदारतापूर्वक दान दिया है,

सदा बनी रहती है उसकी सच्चाई और धार्मिकता;

उसकी महिमा सदैव ऊंची होती रहती है.

10यह सब देखकर दुष्ट अत्यंत कुपित हो जाता है,

वह दांत पीसता है और गल जाता है;

दुष्ट की अभिलाषाएं अपूर्ण ही रह जाएंगी.