Священное Писание

Есфирь 6:1-14

Мардохею оказываются почести

1Той ночью царь никак не мог уснуть и велел принести и читать ему книгу памятных записей, летопись его царствования. 2Там было найдено, как Мардохей разоблачил Бигтана и Тереша, двух царских евнухов, охранявших порог, которые составили заговор, чтобы убить царя Ксеркса.

3– Какие почести и сан получил за это Мардохей? – спросил царь.

– Ничего для него не сделали, – ответили слуги, которые прислуживали ему.

4Царь сказал:

– Кто сейчас во дворе?

А Аман только что вошёл тогда во внешний двор дворца говорить с царём о том, чтобы повесить Мардохея на виселице, которую он для него поставил.

5Его слуги ответили:

– Во дворе сейчас стоит Аман.

– Пусть войдёт, – сказал царь.

6Когда Аман вошёл, царь спросил его:

– Что следует сделать для человека, которого царь желает почтить?

Аман подумал про себя: «Кого же ещё царь хочет почтить, как не меня?» 7И он ответил царю:

– Пусть для человека, которого царь желает почтить, 8принесут одежды, что носит царь, и приведут коня, на котором ездит царь, – того коня, у которого на голове царский венец. 9Потом пусть одежды и коня дадут одному из самых высоких царских сановников. Пусть он оденет человека, которого царь желает почтить, и ведёт его коня под уздцы по городским улицам, возвещая перед ним во всеуслышание: «Вот что делается для человека, которого царь желает почтить!»

10– Ступай тотчас же, – приказал Аману царь, – возьми одежды и коня и сделай так, как только что посоветовал, для иудея Мардохея, который сидит у царских ворот. Не забудь ничего из того, что ты предложил.

11И Аман взял одежды и коня. Он одел Мардохея и повёл его коня под уздцы по городским улицам, возвещая перед ним во всеуслышание: «Вот что делается для человека, которого царь желает почтить!»

12После этого Мардохей вернулся к царским воротам. А Аман поспешил домой, закрыв от горя голову, 13и рассказал своей жене Зерешь и всем своим друзьям обо всём, что с ним случилось.

Его советники и жена Зерешь сказали ему:

– Раз Мардохей, из-за которого началось твоё падение, из иудеев, то ты не сможешь устоять против него и непременно погибнешь!

14Когда они ещё говорили с ним, прибыли царские евнухи и стали торопить его идти на пир, который приготовила Есфирь.

Hindi Contemporary Version

एस्तेर 6:1-14

राजा द्वारा मोरदकय का सम्मान

1उस रात राजा को नींद नहीं आई, तब उसने आदेश दिया, कि इतिहास की पुस्तक लायी जाए, कि उसे राजा के सामने वाचन किया जाए. 2वहां पुस्तक में यह बात सामने आयी, कि राजा के दो द्वारपाल खोजा, बिगथान एवं तेरेश का राजा अहषवेरोष की हत्या का षडयंत्र मोरदकय द्वारा सूचित किया गया था.

3राजा ने पूछा, “मोरदकय को इसके लिए कौन सा सम्मान अथवा पुरस्कार दिया जाए?” राजा के परिचाराकों ने उत्तर दिया.

“कुछ भी नहीं किया गया है उसके लिए.”

4राजा ने पूछा, “कौन है इस समय आंगन में?” हुआ यह था, कि हामान ने इसी समय राजमहल परिसर के बाहर के आंगन में प्रवेश किया था, कि वह राजा से मोरदकय को उन स्तंभों पर लटकाने की चर्चा कर सके, जो उसने मोरदकय के लिए बनवाया था.

5राजा के अधिकारियों ने उसे सूचित किया, “महाराज, हामान आंगन में ठहरे हुए हैं.”

राजा ने आदेश दिया, “उसे यहां आने दो.”

6हामान भीतर आ गया. राजा ने उससे प्रश्न किया, “यह बताओ, यदि राजा किसी व्यक्ति को सम्मान प्रदान करना चाहे, तो इसके लिए क्या-क्या उपयुक्त होगा?”

हामान के मन में विचार आया: “मेरे अतिरिक्त राजा भला किसे सम्मानित करना चाहेंगे?” 7हामान ने राजा को उत्तर दिया, “राजा जिस व्यक्ति को सम्मान करना चाहें, 8उसके लिए वही राजसी पोशाक लाया जाए, जो स्वयं राजा पहना करते हैं, उसे वही घोड़ा दिया जाए, जिसका प्रयोग स्वयं राजा करते हैं, तथा उसके सिर पर राजसी मुकुट भी रखा जाए; 9यह राजसी पोशाक एवं घोड़ा राजा के सर्वोच्च शासक को सौंपा जाए कि वह यह राजसी वस्त्र उस व्यक्ति को पहना दे, जिसे राजा आदर करना चाहते हैं. तब उस व्यक्ति को घोड़े पर सवार किया जाए और उसे इस तरह से नगर चौक में लेकर घुमाया जाए. यह करते हुए उसके आगे-आगे यह घोषणा की जाए: ‘राजा जिस व्यक्ति को आदर करना चाहते हैं, उसके साथ यही किया जाएगा.’ ”

10राजा ने हामान को आदेश दिया, “तुरंत वे राजसी वस्त्र तथा घोड़ा लो, जैसा सुझाव अभी तुमने रखा है और यहूदी मोरदकय के साथ वह सब करो, जो इस समय राजमहल के परिसर के द्वार पर बैठा हुआ है. तुमने जैसा-जैसा सुझाव रखा है, उसमें कोई कमी न आने पाए.”

11तब हामान ने राजसी पोशाक, वस्त्र लिया और घोड़ा लिया. उसने मोरदकय को वह राजसी पोशाक, वस्त्र पहनाया और उसे घोड़े पर सवार करके नगर चौक में घुमाया. उसके आगे-आगे यह घोषणा किया जा रह था: “उस व्यक्ति के साथ ऐसा ही किया जाएगा, जिसे राजा आदर करना चाहते हैं.”

12मोरदकय तो राजमहल परिसर द्वार पर लौट गया; किंतु हामान तुरंत अपने घर को विलाप करता अपने सिर को ढांप कर लौट गया. 13उसने अपनी पत्नी ज़ेरेष तथा अपने मित्रों को अपनी आप सब कुछ कह सुनाया.

यह सुन उसकी पत्नी ज़ेरेष तथा उसके बुद्धिमानी ने उसे चेतावनी दी, “यदि मोरदकय, जिसके सामने तुम्हारे पतन का शुरुआत हो चुका है, यहूदी मूल का है, तब तुम उसे पराजित न पाओगे-तुम्हारा पतन सुनिश्चित है.” 14जब उनके मध्य यह वार्तालाप चल रही थी, वहां राजा के खोजा आ पहुंचे और हामान को तत्काल अपने साथ उस भोज के लिए ले गए, जिसे एस्तेर ने तैयार किया था.