Bibelen på hverdagsdansk

Haggajs Bog 1:1-15

Gud befaler folket at genopbygge templet

1Profeten Haggaj modtog følgende budskab fra Herren den første dag i den sjette måned af kong Dareios’ andet regeringsår. Haggaj fik besked på at give det videre til Judas guvernør, Zerubbabel, søn af Shealtiel, og ypperstepræsten Josva, søn af Jotzadak.

2„Hør hvad Gud, den Almægtige, siger: Hvorfor siger folk, at tiden endnu ikke er inde til at genopbygge mit tempel? 3-4Mener I virkelig, at det er rigtigt af jer at bo i fornemme huse, når mit hus stadig ligger i ruiner? 5Tænk over, hvordan det går med jer: 6I planter og sår, men får en dårlig høst. I mangler både mad og drikke og tøj, og jeres arbejdsløn forsvinder som i en hullet pung. 7Se jer omkring og tænk over situationen.

8Gå nu op i bjergene og hent tømmer, så mit tempel kan blive færdigbygget, og jeg kan glæde mig over det og vise jer min herlighed.

9I håber på en god høst, men det bliver kun til lidt, og den smule I henter hjem, forsvinder som dug for solen. Hvorfor? Fordi mit hus ligger i ruiner, mens I har travlt med at bygge huse til jer selv. 10Derfor holder jeg regnen tilbage, så I får en dårlig høst. 11Jeg lader tørken ramme både lavland og højland, korn og druer, oliven og de øvrige afgrøder. Både mennesker og kvæg lider under det. Alt jeres møjsommelige arbejde er spildt.”

12Da adlød de alle sammen Herrens ord, som kom til dem gennem profeten Haggaj. Både guvernøren Zerubbabel, ypperstepræsten Josva og den rest af befolkningen, som var kommet tilbage til landet, adlød, for de var klar over, at budskabet var fra Gud, og de tog det alvorligt.

13Profeten Haggaj gav da folket følgende ord fra Herren: „Jeg vil være med jer og velsigne jer!” 14-15Og Gud gjorde Zerubbabel, Josva og hele folket så opsat på at genopbygge Herrens, den Almægtiges, tempel, at de allerede den 24. i samme måned tog fat på arbejdet.

Hindi Contemporary Version

हाग्गय 1:1-15

याहवेह के मंदिर पुनर्निमाण का आदेश

1राजा दारयावेश के शासनकाल के द्वितीय वर्ष के छठवें महीने के पहले दिन शिअलतिएल के पुत्र यहूदिया के राज्यपाल ज़ेरुब्बाबेल, तथा यहोत्सादाक के पुत्र महापुरोहित यहोशू के पास याहवेह का यह वचन हाग्गय भविष्यवक्ता के द्वारा पहुंचा:

2सर्वशक्तिमान याहवेह का यह कहना है: “ये लोग कहते हैं, ‘याहवेह के भवन के पुनर्निर्माण का समय अभी नहीं आया है.’ ”

3तब हाग्गय भविष्यवक्ता के द्वारा याहवेह का यह वचन आया: 4“क्या यह समय है कि तुम खुद पक्के-भव्य घरों में रहो, और यह भवन उजाड़ पड़ा रहे?”

5तब सर्वशक्तिमान याहवेह का यह कहना है: “अपने चालचलन पर सावधानीपूर्वक ध्यान दो. 6तुमने बोया यो बहुत, पर तुम्हें फसल थोड़ा मिला. तुम खाते तो हो, किंतु तुम्हारा पेट कभी नहीं भरता. तुम पीते तो हो, किंतु तुम्हारी प्यास कभी नहीं बुझती. तुम कपड़े पहनते तो हो, किंतु तुम्हें उससे गर्मी नहीं मिलती. तुम मजदूरी तो कमाते हो, किंतु यह कैसे खर्च हो जाता है तुम्हें पता भी नहीं चलता.”

7सर्वशक्तिमान याहवेह का यह कहना है: “अपने चालचलन पर सावधानीपूर्वक ध्यान दो. 8ऊपर पहाड़ों में जाओ और इमारती लकड़ी नीचे लाकर मेरे भवन को बनाओ, ताकि मुझे खुशी मिले और मेरा आदर हो,” याहवेह का कहना है. 9“तुमने बहुत फसल पाने की आशा की थी, पर थोड़ा ही मिला. और जब तुम उसे लेकर घर आए, तो मैंने उसे उड़ा दिया. क्यों?” सर्वशक्तिमान याहवेह का कहना है. “क्योंकि मेरा भवन उजाड़ पड़ा है, और तुममें से हर एक अपने-अपने घर में व्यस्त है. 10इसलिये, तुम्हारे कारण ही आकाश ने ओस और भूमि ने उपज पैदा करना रोक दिया है. 11मैंने आदेश दिया है कि खेतों और पहाड़ों पर, अनाज, नये अंगूर की दाखमधु, जैतून तेल और भूमि की हर एक उपज पर, लोगों और घरेलू पशुओं पर, और तुम्हारे सब मेहनत पर अकाल पड़े.”

12तब शिअलतिएल के पुत्र ज़ेरुब्बाबेल, यहोत्सादाक का पुत्र महापुरोहित यहोशू, और सब बचे हुए लोग याहवेह, अपने परमेश्वर के वचन और हाग्गय भविष्यवक्ता के संदेश का पालन किया, क्योंकि याहवेह उनके परमेश्वर ने उसे भेजा था. और लोगों ने याहवेह का भय माना.

13तब याहवेह के संदेशवाहक हाग्गय ने लोगों को याहवेह का यह संदेश दिया: “मैं तुम्हारे साथ हूं,” याहवेह घोषणा करते हैं. 14तब याहवेह ने यहूदिया के राज्यपाल शिअलतिएल के पुत्र ज़ेरुब्बाबेल, और यहोत्सादाक के पुत्र महापुरोहित यहोशू तथा सारे बचे हुए लोगों की आत्मा को उभारा. वे सब आये और सर्वशक्तिमान याहवेह, अपने परमेश्वर के भवन के निर्माण का कार्य शुरू किए, 15और यह कार्य राजा दारयावेश के शासनकाल के छठवें महीने के चौबीसवें दिन शुरू हुआ.